कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राजस्थान के झुंझुनू में धोखाधड़ी के एक मामले में वांछित रामचंद्र नाम का व्यक्ति दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मौजूद था। रिपोर्ट के अनुसार, वह आंदोलन के दौरान मंच के आसपास भी दिखाई दिया और कई दिनों तक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहा।
सोशल मीडिया की तस्वीरों से हुई पहचान
रिपोर्ट के मुताबिक, झुंझुनू निवासी शिकायतकर्ता साजिद दीवान ने सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो में रामचंद्र को पहचानने का दावा किया। इसके बाद पुलिस को उसकी मौजूदगी की जानकारी दी गई। संबंधित रिपोर्ट में मामला करीब ₹17 लाख की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया गया है।
हालांकि, इन आरोपों और रामचंद्र की CJP में औपचारिक भूमिका को लेकर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सीमित है। इसलिए उसे पार्टी का पदाधिकारी या दोषी बताने के बजाय पुलिस जांच और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ही मामले को देखा जाना चाहिए।
फरवरी 2025 में दर्ज हुआ था मामला
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, रामचंद्र के खिलाफ फरवरी 2025 में झुंझुनू कोतवाली पुलिस थाने में वाहन खरीद-बिक्री से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में शिकायत दर्ज की गई थी। पुलिस कथित तौर पर उसकी तलाश कर रही थी और जंतर-मंतर पर उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद राजस्थान पुलिस की एक टीम दिल्ली भी पहुंची।
भीड़ के कारण गिरफ्तारी नहीं होने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया कि राजस्थान पुलिस की टीम ने प्रदर्शन स्थल पर रामचंद्र पर नजर रखी, लेकिन भारी भीड़ और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते तत्काल गिरफ्तारी नहीं की गई। कथित योजना थी कि भीड़ कम होने के बाद कार्रवाई की जाए, लेकिन पुलिस को ऐसा मौका नहीं मिला।
CJP से जुड़े होने का दावा
रामचंद्र के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर खुद को CJP की कथित “कोर कमेटी” से जुड़ा बताया गया होने का भी दावा रिपोर्ट में किया गया है। हालांकि, CJP की ओर से उसकी सदस्यता या पद को लेकर कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को भी सत्यापित तथ्य के बजाय रिपोर्टेड क्लेम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CJP हाल के महीनों में जंतर-मंतर पर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करती रही है। जून 2026 में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की तय समय-सीमा को लेकर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को नोटिस भी जारी किया था। इससे पहले और बाद में पार्टी के प्रदर्शन तथा उससे जुड़े कुछ लोगों को लेकर अलग-अलग विवाद भी सामने आए हैं।
फिलहाल रामचंद्र से जुड़े धोखाधड़ी मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।