उज्जैन के एसबीआई लूटकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की जाँच में सामने आया कि यह कोई बाहरी गैंग नहीं, बल्कि बैंक के ही एक कर्मचारी की करतूत थी। आरोपी का नाम जीशान है, जो करीब 6 महीने पहले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर आउटसोर्स के माध्यम से बैंक में नियुक्त हुआ था।
बैंककर्मी ने रची साजिश
बैंक अधिकारियों ने जीशान पर भरोसा करके उसे बैंक की चाबी सौंप दी थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने अपने चार दोस्तों साहिल, अब्दुल्ला, अरबाज और कोहिनूर के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई।

कैसे हुई वारदात?
1 सितंबर की रात करीब ढाई बजे जीशान अपने साथियों के साथ बैंक में दाखिल हुआ। महज 35 मिनट के भीतर उन्होंने 4.7 किलो सोना और 8 लाख रुपये नकद चुरा लिए। खास बात यह है कि बैंक के ताले नहीं तोड़े गए, बल्कि चाबी से ही खोले गए।
पुलिस की पूछताछ में खुलासा
सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर पुलिस ने जब जीशान से सख्ती से पूछताछ की तो पूरी गुत्थी सुलझ गई। सामने आया कि जीशान का असली नाम जय भावसार था। उसने बताया कि वह यूट्यूब देखकर इस्लाम कबूल कर चुका है और तभी से उसने अपना नाम बदल लिया। हालांकि, पुलिस उसकी इस बात की भी गहराई से जाँच कर रही है कि आखिर जय से जीशान बनने की पूरी कहानी क्या है।
पहले भी रची थी साजिश
पुलिस को पता चला कि बैंक के ग्राउंड फ्लोर पर करीब 15 दिन पहले आग लगी थी। उस समय भी जीशान ने अपने चारों दोस्तों को मौके पर बुलाया था। शक जताया जा रहा है कि उसी दौरान उन्होंने बैंक की रेकी की थी और लॉकर को खुला छोड़ दिया था। अब जाँच का विषय यह भी है कि कहीं आग जानबूझकर तो नहीं लगाई गई थी ताकि लूट की योजना को अंजाम देना आसान हो सके।
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