बिहार के सारण ज़िले में धर्मांतरण से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ ‘जादुई पानी’ के नाम पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए बरगलाने का आरोप लगा है। इस पूरे विवाद के केंद्र में एक ईसाई पादरी ‘पनिया बाबा’ उर्फ वैधजी है, जो नेपाल से आया बताया जा रहा है। आरोप है कि वह गाँव-गाँव जाकर लोगों को चमत्कारी पानी पिलाता था और दावा करता था कि इससे उनकी बीमारियाँ दूर हो जाएँगी और जीवन की सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। कई ग्रामीणों का कहना है कि वह लोगों को यह कहकर ईसाई धर्म की ओर मोड़ने की कोशिश करता था कि प्रभु यीशु की कृपा से असाध्य रोग भी ठीक हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि यह पूरा खेल मिशनरी फंडिंग से चल रहा था। कई ग्रामीणों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने पादरी का पानी पीकर देखा लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। एक व्यक्ति ने साफ कहा कि उसने सात दिनों तक पानी पिया, लेकिन न बीमारी ठीक हुई और न ही कोई सुधार दिखा। दूसरी ओर, एक महिला ने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर यह बाबा लोगों को मानसिक रूप से बहकाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करता था। एक अन्य युवक ने तंज कसते हुए कहा कि यदि बाबा के पास सच में चमत्कार है तो वह उनकी बीमारी ठीक करके दिखाए।
‘पनिया बाबा’ खुले तौर पर दावा करता था कि उसका पढ़ा हुआ पानी इतना असरदार है कि कैंसर जैसी बीमारी भी उससे ठीक हो सकती है। उसने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति मौत के करीब हो, चलने-फिरने की हालत में न हो, तो भी तीन महीनों में वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। इसके साथ ही वह अपनी सभाओं में यह प्रचार करता था कि रात को सोने से पहले और सुबह उठकर प्रभु यीशु का नाम लेना चाहिए। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वह मंदिरों को शैतान का स्थान बताता था। हालाँकि, पूछे जाने पर उसने इस आरोप से इनकार कर दिया। उसने खुद को पादरी और ईसाई प्रचारक बताते हुए सभी धर्मों का सम्मान करने का दावा किया।
इस मामले में प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। सारण पुलिस ने बताया कि ‘पनिया बाबा’ पर लगे आरोप गंभीर हैं और मामले की जाँच पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) और अनुमंडल पदाधिकारी (मढ़ौरा) को सौंपी गई है। पुलिस के अनुसार, बाबा की एक सभा के लिए SDO ने अनुमति दी थी और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल भी तैनात किए गए थे। यह सभा पिछले बुधवार को मदारपुर, भेल्दी थाना क्षेत्र में आयोजित की गई थी। लेकिन अब, बढ़ते विवाद और गंभीर आरोपों को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यह मामला न केवल धर्मांतरण की संभावित साजिश की ओर इशारा करता है, बल्कि ग्रामीणों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने और भोले-भाले लोगों को झूठे दावों से फँसाने की साजिश को भी उजागर करता है। अब सबकी नज़र पुलिस की जाँच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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