बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की हत्या के विरोध में कोलकाता में बुधवार को एक बार फिर लोग सड़कों पर उतर आए। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे बीजेपी समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। टकराव उस समय शुरू हुआ, जब पुलिस ने बीजेपी के मार्च को हावड़ा पुल तक पहुँचने से पहले ही रोक दिया। इससे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस हो गई।
हावड़ा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम किसी को भी आम जनता के सामान्य जीवन में बाधा डालने और प्रदर्शन के नाम पर यात्रियों को परेशान करने की अनुमति नहीं देंगे। किसी भी तरह की परेशानी पैदा करने की कोशिश को कानून के मुताबिक रोका जाएगा।” पुलिस के मार्च रोकते ही प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
इसी बीच भीड़ ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि हालात बिगड़ने लगे थे, जिसके बाद बैरिकेड तोड़ने का प्रयास कर रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हल्का बल प्रयोग किया गया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, जब प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए और सड़क जाम करने लगे, तब उन्हें तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। बीजेपी नेता और कार्यकर्ता बुधवार सुबह से ही हावड़ा पुल की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें पुल तक पहुँचने से पहले रोक दिया गया।
यह प्रदर्शन बांग्लादेश के माइमेंसिंग जिले के बालुका में 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में किया जा रहा था। बताया गया है कि 18 दिसंबर को ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला और बाद में उनके शव को आग के हवाले कर दिया।
इससे पहले मंगलवार को भी सैकड़ों लोगों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर कथित हमलों के विरोध में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन तक मार्च करने की कोशिश की थी। रैली सियालदह से शुरू होकर पार्क सर्कस स्थित डिप्टी हाई कमीशन के कार्यालय की ओर जा रही थी, लेकिन पुलिस ने बेक बागान इलाके में इसे रोक दिया। जब प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
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