केंद्र सरकार द्वारा स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पूरे छंद को गाना अनिवार्य किए जाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे गैरकानूनी बताया है और नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग की है।
धार्मिक आजादी और धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा
AIMPLB का कहना है कि वंदे मातरम के कुछ छंदों में देवी-देवताओं, विशेष रूप से दुर्गा की आराधना का उल्लेख है, जो मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। बोर्ड ने कहा कि मुस्लिम केवल एक अल्लाह की इबादत करता है, इसलिए ऐसे छंदों को अनिवार्य करना धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
مرکزی حکومت کے ”وندے ماترم“ تمام اشعار کو اسکول و سرکاری تقریبات میں لازمی قرار دینے کا نوٹیفیکیشن غیر آئینی، مذہبی آزادی و سیکولر اقدار کے منافی اور عدالت عظمیٰ کے فیصلے کے خلاف ہے۔ اس میں درگا اور دیگر دیویوں اور دیوتاؤں کی پوجا اور وندنا کی بات کہی گئی ہے۔ جو مسلمانوں کے عقیدے… pic.twitter.com/5dmaoUXD8G
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) February 12, 2026
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
बोर्ड ने दावा किया कि देश की अदालतें पहले भी वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को अनिवार्य रूप से गाने के खिलाफ टिप्पणी कर चुकी हैं। AIMPLB के अनुसार, यह कदम सेक्युलर मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत है और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का उल्लंघन करता है।
कोर्ट जाने की चेतावनी
संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए केंद्र सरकार से नोटिफिकेशन तुरंत वापस लेने की मांग की है। AIMPLB ने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।
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