Amit Shah आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश करने जा रहे हैं, जिसमें CAPF में वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के नियम तय किए जाएंगे। इस बिल को लेकर CAPF और IPS अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्या है CAPF विधेयक?
इस विधेयक में Border Security Force (BSF), Central Reserve Police Force (CRPF), Indo-Tibetan Border Police (ITBP) और Central Industrial Security Force (CISF) जैसे बलों में IG और उससे ऊपर के पदों पर नियुक्ति के नियम तय किए गए हैं।
IG स्तर पर IPS का 50% कोटा
बिल के अनुसार:
- DG (डायरेक्टर जनरल) पद पर IPS अधिकारी ही नियुक्त होंगे
- ADG स्तर पर 67% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे
- IG स्तर पर 50% पद IPS अधिकारियों के लिए तय किए गए हैं
हालांकि, Supreme Court of India ने 2025 में अपने आदेश में कहा था कि IG स्तर पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति को दो साल में कम किया जाए, ताकि CAPF कैडर अधिकारियों को ज्यादा अवसर मिल सकें।
CAPF बनाम IPS विवाद क्या है?
यह पूरा विवाद CAPF कैडर अधिकारियों और IPS अधिकारियों के बीच प्रमोशन और नियुक्ति को लेकर है।
- IPS अधिकारी डेप्युटेशन पर CAPF में आते हैं
- CAPF कैडर अधिकारी सीधे भर्ती होकर सेवा करते हैं
जहां IPS अधिकारी 13-14 साल में DIG बन जाते हैं, वहीं CAPF कैडर अधिकारियों को इसी पद तक पहुंचने में 25-30 साल लग जाते हैं।
प्रमोशन में देरी से बढ़ा असंतोष
आंकड़ों के मुताबिक:
- 60% से अधिक CAPF अधिकारी लंबे समय तक एक ही पद पर रहते हैं
- पिछले 5 साल में VRS लेने वालों की संख्या में 25% वृद्धि हुई
- 3 साल में 20,000 से ज्यादा जवान और अधिकारी नौकरी छोड़ चुके हैं
इससे CAPF अधिकारियों में असंतोष बढ़ा और यह मुद्दा CAPF बनाम IPS की लड़ाई बन गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नया प्रावधान
बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार को इस मामले में नए नियम बनाने का अधिकार होगा, भले ही पहले कोई न्यायालय का आदेश क्यों न हो।
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