प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को महावीर जयंती के पावन अवसर पर कोबा में ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह संग्रहालय जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा, जो हमारी प्राचीन धरोहर को आधुनिक रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा।
सम्राट संप्रति के आदर्शों को किया याद
पीएम मोदी ने सम्राट संप्रति को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राजसिंहासन पर रहते हुए भी अहिंसा और सत्य के मार्ग को अपनाया। वे सम्राट अशोक महान के पोते थे और जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

‘ज्ञान भारतम मिशन’ का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ शुरू किया गया है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से पुराने ग्रंथों को डिजिटल किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें।
देशवासियों के लिए 10 संकल्प
आज का यह अवसर 9 संकल्पों को दोहराने का है…
पहला संकल्प: पानी बचाने का
दूसरा संकल्प: एक पेड़ मां के नाम
तीसरा संकल्प: स्वच्छता का मिशन
चौथा संकल्प: वोकल फॉर लोकल
पांचवां संकल्प: देश दर्शन
छठा संकल्प: प्राकृतिक खेती को अपनाना
सातवां संकल्प: स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना
आठवां… pic.twitter.com/KJvwEVFP4g
— BJP (@BJP4India) March 31, 2026
इस खास मौके पर पीएम मोदी ने देश के लिए 10 महत्वपूर्ण संकल्प भी प्रस्तुत किए:
- पानी बचाना
- ‘एक पेड़ माँ के नाम’ लगाना
- स्वच्छता को बढ़ावा देना
- वोकल फॉर लोकल अपनाना
- देश दर्शन (टूरिज्म) को बढ़ावा
- प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाना
- योग और खेल को बढ़ावा
- गरीबों की मदद करना
- भारत की विरासत को सहेजना
जैन संतों ने की प्रधानमंत्री की सराहना
कार्यक्रम के दौरान जैनाचार्य पद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज ने प्रधानमंत्री की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने हर संकट के समय देशवासियों का ध्यान रखा और उनकी कार्यशैली अन्य नेताओं से अलग है।
संग्रहालय में क्या है खास?
‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ में भारत की प्राचीन विरासत को दर्शाने वाली कई दुर्लभ वस्तुएं रखी गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पत्थर और धातु से बनी बारीक नक्काशी वाली मूर्तियाँ
- प्राचीन सिक्के
- चांदी के रथ
- दुर्लभ पांडुलिपियाँ
यह संग्रहालय आने वाले समय में ज्ञान, शोध और संस्कृति का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
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