असम में विनाशकारी बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट सहित ऊपरी असम के कई जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। घरों, सड़कों, स्कूलों, बिजली व्यवस्था और कृषि भूमि को व्यापक नुकसान पहुंचा है। राज्य में इस वर्ष बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है। मौजूदा चरण में 563 गांवों के 1.6 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
जुलाई के अंतिम सप्ताह में बाढ़ का प्रभाव और भी व्यापक था। उस समय राज्य के विभिन्न जिलों में 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे और बड़ी संख्या में गांव पानी में डूबे हुए थे। शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहे। कई स्थानों पर ऐसी बाढ़ आई, जहां दशकों से इस स्तर का जलभराव नहीं देखा गया था।
बिजली बहाली और पुनर्वास पर सरकार का जोर
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि बाढ़ का पानी कम होने के साथ राज्य सरकार का ध्यान राहत कार्यों के अलावा बिजली आपूर्ति बहाल करने, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर केंद्रित हो गया है।
मुख्यमंत्री ने लगातार कई दिनों तक शिवसागर और चराइदेव सहित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत शिविरों, क्षतिग्रस्त शिक्षण संस्थानों और प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया। राज्य सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है।
सरकार ने लगभग 75 हजार प्रभावित परिवारों को अंतरिम सहायता के रूप में 15-15 हजार रुपये की पहली किस्त जारी की है। बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने के कारण कई क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
सेना और आपदा राहत बलों का बचाव अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एसडीआरएफ, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं और असम पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
तेज बहाव के दौरान कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। ऐसे क्षेत्रों में सेना और एनडीआरएफ के जवानों ने नावों एवं अन्य संसाधनों की सहायता से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। राहत शिविरों और वितरण केंद्रों के माध्यम से विस्थापित परिवारों को भोजन, पीने का पानी, दवाइयां तथा आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सेवा भारती और RSS स्वयंसेवकों ने संभाला राहत मोर्चा
सरकारी एजेंसियों के साथ सेवा भारती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वयंसेवक भी राहत एवं पुनर्वास अभियान में सक्रिय हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो हजार स्वयंसेवकों ने पूर्वी असम के तीन जिलों में 40 हजार से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाई है।
स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, चिकित्सा शिविर आयोजित करने, घरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तथा पुनर्वास गतिविधियों में सहयोग किया है।
सेवा भारती के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुरेंद्र कुमार के अनुसार, जुलाई में हुई अत्यधिक बारिश के बाद अचानक कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बन गई थी। पानी का बहाव इतना तेज था कि शुरुआती घंटों में केवल सेना और प्रशिक्षित आपदा राहत कर्मी ही कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सके। बहाव कम होने के बाद स्थानीय स्वयंसेवकों ने गांवों में राहत सामग्री पहुंचानी शुरू की।
जोरहाट, शिवसागर और मोरान में राहत केंद्र
राहत अभियान को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए जोरहाट, शिवसागर और मोरान में प्रमुख सहायता केंद्र स्थापित किए गए। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों से प्राप्त राहत सामग्री को इन केंद्रों पर एकत्र कर प्रभावित गांवों में भेजा जा रहा है।
स्वयंसेवकों द्वारा राशन किट, मच्छरदानियां, मोमबत्तियां, पीने के पानी की बोतलें, दवाइयां, स्वच्छता सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित की गई हैं। बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के कारण कई स्थानों पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए गए हैं।
स्वच्छ पेयजल बनी सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सबसे गंभीर समस्याओं में शामिल है। जलस्रोतों के दूषित हो जाने के कारण बड़ी मात्रा में बोतलबंद पानी प्रभावित परिवारों तक पहुंचाया गया है।
हालांकि, लाखों प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल से पर्यावरणीय संकट पैदा होने की आशंका भी सामने आई है। इसे देखते हुए सेवा भारती ने जल शुद्धीकरण संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है। संयंत्र से शुद्ध किया गया पानी 20 लीटर के जार में भरकर प्रभावित परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे प्लास्टिक कचरे को कम करने के साथ नियमित रूप से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने दिया हरसंभव सहायता का भरोसा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित नेपाली खुटी गांव का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने राहत, पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
केंद्र की छह सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम भी चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर चुकी है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राहत एवं वित्तीय सहायता निर्धारित किए जाने की संभावना है।
राहत सामग्री देने के लिए आगे आए लोग
असम में आई इस प्राकृतिक आपदा के बीच सामाजिक सहयोग की कई सकारात्मक तस्वीरें भी सामने आई हैं। स्थानीय नागरिक, स्वयंसेवी संगठन, धार्मिक-सामाजिक संस्थाएं और कारोबारी समूह राहत सामग्री एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
लोगों की सक्रिय भागीदारी के कारण दूरदराज के गांवों तक राशन, पानी, कपड़े और दवाइयां पहुंचाने में मदद मिल रही है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब सरकार और सामाजिक संगठनों के सामने घरों की सफाई, पेयजल व्यवस्था, बिजली बहाली, स्वास्थ्य सुरक्षा और आजीविका को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है।
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