उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये के इनामी अपराधी मोहम्मद फुरकान को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार फुरकान कुख्यात मुकीम काला गिरोह का सक्रिय सदस्य था और उसका नाम कैराना से परिवारों के पलायन से जुड़े मामले में भी सामने आया था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट और अन्य गंभीर अपराधों के 20 से अधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
झिंझाना क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को बुधवार, 5 अगस्त 2026 को फुरकान की गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद स्वाट टीम और स्थानीय पुलिस ने शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र में घेराबंदी की।
पुलिस का दावा है कि खुद को घिरा देखकर फुरकान ने पुलिस दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद करने की बात कही है।
चार साल से फरार था फुरकान
फुरकान लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वह हत्या, लूट और रंगदारी जैसे कई गंभीर मामलों में वांछित था।
फुरकान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात मुकीम काला गिरोह का प्रमुख सदस्य बताया जाता था। यह गिरोह कैराना और आसपास के क्षेत्रों में हत्या, रंगदारी, लूट और व्यापारियों को धमकाने जैसी घटनाओं के लिए बदनाम रहा है।
व्यापारी हत्याकांड में आया था नाम
फुरकान का नाम कैराना के व्यापारी विनोद सिंघल की हत्या और क्षेत्र के कारोबारियों से रंगदारी मांगने के मामलों से भी जोड़ा गया था। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य व्यापारियों को धमकाकर पैसे मांगते थे और विरोध करने वालों को निशाना बनाते थे।
साल 2017 की एक पुलिस कार्रवाई के दौरान भी फुरकान को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने कहा था कि उसकी आपराधिक गतिविधियों के कारण कैराना के व्यापारियों और स्थानीय परिवारों में भय का माहौल बना था।
कैराना पलायन विवाद से कैसे जुड़ा नाम?
साल 2016 में तत्कालीन भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना छोड़ने वाले 346 हिंदू परिवारों की सूची जारी की थी। उन्होंने दावा किया था कि अपराधियों की धमकियों, रंगदारी और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण परिवार पलायन करने को मजबूर हुए।
हालांकि, कैराना पलायन के कारणों को लेकर उस समय राजनीतिक दलों, स्थानीय प्रशासन और अलग-अलग जांच समूहों ने अलग-अलग दावे किए थे। कुछ रिपोर्टों में अपराध और डर को प्रमुख कारण बताया गया, जबकि प्रशासनिक सर्वेक्षणों में रोजगार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे कारण भी सामने आए थे।
फुरकान का नाम उन अपराधियों में शामिल किया गया, जिनकी कथित रंगदारी और हिंसक गतिविधियों ने इलाके के व्यापारियों में भय पैदा किया था। ताजा पुलिस कार्रवाई के बाद कैराना पलायन से जुड़ा यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
योगी सरकार में संगठित अपराध पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई। कैराना से गए कुछ परिवारों की वापसी और सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कदम उठाने का दावा किया था।
फुरकान के मारे जाने को पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी सफलता बता रही है। मुठभेड़ की परिस्थितियों और बरामद हथियारों से संबंधित आगे की कानूनी तथा फॉरेंसिक कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
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