आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में बहस: सॉलिसिटर जनरल का तंज—मांस खाने वाले भी बन गए एनिमल लवर
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई हुई। कोर्ट के कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के फैसले को लेकर पक्ष और विपक्ष में बहस जारी रही, जिसे सुनने के लिए तीन सदस्यीय पीठ बैठी।
दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता, लेकिन समाधान जरूरी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“मैंने लोगों को मांस खाते हुए वीडियो पोस्ट करते और खुद को पशु प्रेमी बताते देखा है।” उनका कहना था कि एक मुखर अल्पसंख्यक है और एक मूक पीड़ित बहुसंख्यक, जबकि आंकड़े चिंताजनक हैं—हर साल 37 लाख, यानी रोजाना 10,000 लोग कुत्तों के काटने से मर रहे हैं। रेबीज से 305 वार्षिक मौतें दर्ज हैं, जबकि WHO के मॉडल में यह संख्या कहीं अधिक है।
Solicitor General Tushar Mehta is literally killing it in Supreme Court.
More power to him.#straydogs pic.twitter.com/NIIJdEDsWL
— SHARATH (@Sharathk99) August 14, 2025
इससे पहले, 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए आदेश दिया था कि आठ सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखा जाए और वापस न छोड़ा जाए।
एनजीओ की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी कि शेल्टर होम पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए आदेश पर फिलहाल रोक लगनी चाहिए।
THE TRUTH!
You can't love stray dogs and eat meat. You're a hypocrite with no right to an opinion on stray dog treatment.
Most celebrities are fake animal lovers, and we must expose them.
— Tattva Rashtra (@rebel_thoughtsX) August 14, 2025
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि स्थानीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और जो भी हस्तक्षेप कर रहा है, वह भी इस समस्या के समाधान में योगदान दे।
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