उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश की विशेष अदालत ने 5 रोहिंग्या और 3 बांग्लादेशी नागरिकों सहित कुल 9 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए 8-8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।
ATS जांच में हुआ था मामले का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश एटीएस की जांच के दौरान हुआ था।
वर्ष 2021 में गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर की गई कार्रवाई के दौरान:
- मोहम्मद नूर, रहमतुल्लाह और शबीउल्लाह को गिरफ्तार किया गया
- उनके कब्जे से नाबालिग लड़कियों समेत कई पीड़ितों को मुक्त कराया गया
प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी
जांच आगे बढ़ने पर उत्तर प्रदेश एटीएस ने इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार किया।
पूरी जांच के बाद मामले में आरोपपत्र विशेष अदालत में दाखिल किया गया, जहां साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई की गई।
Nine people, including Rohingya and Bangladeshi nationals, sentenced to 8 years of rigorous imprisonment and fined for illegal infiltration, forgery, and human trafficking: UP STF pic.twitter.com/Gedjat7HXS
— ANI (@ANI) April 10, 2026
कोर्ट का फैसला: कठोर सजा और जुर्माना
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत सबूतों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपितों को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में:
- प्रत्येक दोषी को 8-8 साल का कठोर कारावास
- हर आरोपी पर ₹2,500 का जुर्माना
लगाने का आदेश दिया।
दोषियों पर अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज रखने और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध साबित हुए।
मानव तस्करी और घुसपैठ पर कड़ा संदेश
यह फैसला उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से:
- संगठित अपराध पर लगाम लगेगी
- मानव तस्करी के नेटवर्क कमजोर होंगे
- अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत होगा
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