गुजरात की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। नर्मदा जिले की राजपीपला अदालत ने डेडियापाड़ा से विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और अन्य आरोपियों को एक चर्चित मामले में दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब आम आदमी पार्टी आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अदालत ने सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया है। मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में कुल 9 आरोपी शामिल हैं, जिनमें 4 महिलाएं भी हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2023 का बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वन विभाग ने सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इसी कार्रवाई को लेकर विवाद पैदा हुआ और मामला धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता गया।
आरोप है कि वन विभाग की कार्रवाई के बाद विधायक चैतर वसावा ने कुछ वन अधिकारियों को अपने आवास पर बुलाया था। वहां अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार, धमकी और मारपीट की गई।
अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने के नाम पर अधिकारियों पर आर्थिक दबाव बनाया गया। जांच में कुछ रकम के ऑनलाइन ट्रांसफर होने की बात भी सामने आई, जिसे मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य निर्वहन से रोकने और दबाव बनाने का प्रयास किया गया था।
हवाई फायरिंग और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी शामिल
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना के दौरान कथित तौर पर हवाई फायरिंग भी की गई थी।
इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा दंगा, वसूली, धमकी, सरकारी काम में बाधा और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी से लेकर सरेंडर तक
घटना के बाद पुलिस ने कुछ आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि विधायक चैतर वसावा ने बाद में आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया था।
बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भरूच लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी। अब अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने और 7 साल की सजा सुनाए जाने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
राजनीतिक असर पड़ने की संभावना
चैतर वसावा आम आदमी पार्टी के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर न केवल डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र बल्कि गुजरात में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 2 वर्ष से अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) के तहत विधायक की सदस्यता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोषी पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करता है या नहीं और उन्हें सजा या दोषसिद्धि पर राहत मिलती है या नहीं।
फिलहाल अदालत के फैसले ने गुजरात की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक तथा कानूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
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