बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता सजीब वाजेद जॉय ने अपने देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जॉय ने कहा कि बांग्लादेश तेजी से एक “नाकाम देश” और “दूसरा पाकिस्तान” बनता जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील करते हुए चेतावनी दी कि स्थिति नहीं संभली तो बांग्लादेश क्षेत्रीय आतंकवाद का बड़ा केंद्र बन सकता है।
जॉय ने यह संबोधन अमेरिका के मैरीलैंड से वर्चुअल माध्यम से दिया। उनका भाषण बुधवार, 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में आयोजित कार्यक्रम में प्रसारित किया गया। इसी कार्यक्रम में शेख हसीना ने भी भारत आने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से मीडिया को संबोधित किया और दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई।
ISI की गतिविधियों को लेकर गंभीर आरोप
जॉय के भाषण का सबसे अहम हिस्सा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI की बांग्लादेश में कथित गतिविधियों से जुड़ा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी खुफिया एजेंसियां, विशेष रूप से ISI, अब बांग्लादेश में खुलेआम सक्रिय हैं।
जॉय ने दावा किया कि अवामी लीग सरकार के दौरान गिरफ्तार और जेल भेजे गए कई दोषी आतंकवादियों को सत्ता परिवर्तन के बाद रिहा कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत-तहरीर खुले तौर पर रैलियां निकाल रहा है और अल-कायदा से संबंध रखने वाले लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों को संबोधित कर चुके हैं।
इन आरोपों की बांग्लादेश सरकार या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। जॉय के बयान को सत्ता से बाहर चल रही अवामी लीग का राजनीतिक पक्ष माना जा रहा है।
‘भारत की पूर्वी सीमा पर दूसरा पाकिस्तान’
जॉय ने कहा, “बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर दूसरा पाकिस्तान बन गया है।” उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथी गतिविधियां भारत, विशेषकर उसके पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहीं तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। जॉय ने भारतीय मीडिया से अपील की कि वह बांग्लादेश की स्थिति को केवल कभी-कभार सामने आने वाली खबर के तौर पर न देखे, बल्कि इस मुद्दे पर लगातार नजर रखे।
शेख हसीना ने किया दिसंबर में लौटने का ऐलान
शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं और तभी से भारत में रह रही हैं। 5 अगस्त के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने के लिए तैयार हैं, भले ही उन्हें गिरफ्तारी या सजा का सामना करना पड़े। बांग्लादेश की एक अदालत उन्हें 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुना चुकी है, जिसे हसीना राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब का कार्यक्रम एक निजी आयोजन था और इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
फरवरी 2026 के चुनाव और अवामी लीग पर प्रतिबंध
जॉय का बयान बांग्लादेश में फरवरी 2026 में हुए संसदीय चुनाव के लगभग छह महीने बाद आया है। इन चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। चुनाव के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनी।
शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। जॉय ने कहा कि देश की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी को प्रतिबंधित रखकर कराए गए चुनाव को सभी नागरिकों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं माना जा सकता।
हालांकि, बांग्लादेश के फरवरी 2026 चुनावों को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। कुछ विशेषज्ञों ने अवामी लीग की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि कार्नेगी एंडोमेंट के एक विश्लेषण में इन चुनावों को लगभग दो दशकों में बांग्लादेश के सबसे विश्वसनीय चुनावों में से एक बताया गया।
2024 के प्रदर्शनों में मौतों के आंकड़े पर सवाल
जॉय ने जुलाई-अगस्त 2024 में हुए प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की संख्या पर भी सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 1 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच करीब 1,400 लोगों की मौत हुई हो सकती है। रिपोर्ट में पूर्व सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और अवामी लीग से जुड़े हिंसक तत्वों पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाए गए थे।
जॉय ने दावा किया कि सरकारी रिकॉर्ड में लगभग 800 मौतों का आंकड़ा दिया गया था और अवामी लीग के वकीलों ने संयुक्त राष्ट्र से अतिरिक्त मृतकों के नाम मांगे थे। उनके अनुसार, इस अनुरोध का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
‘इंडेम्निटी कानून’ पर भी उठाए सवाल
सजीब वाजेद जॉय ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में लाए गए कथित “इंडेम्निटी कानून” की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए आंदोलन में शामिल लोगों को व्यापक कानूनी सुरक्षा दी गई, जिससे पुलिसकर्मियों, आम नागरिकों और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की हत्या के मामलों में कार्रवाई मुश्किल हो गई।
जॉय ने दावा किया कि बाद में BNP सरकार ने भी इस व्यवस्था को स्वीकार कर लिया। हालांकि, कानून के दायरे, उसके वास्तविक प्रावधानों और उसके अंतर्गत संरक्षित गतिविधियों पर बांग्लादेश सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
अवामी लीग नेताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी का आरोप
जॉय ने आरोप लगाया कि अवामी लीग के हजारों नेता और समर्थक लंबे समय से बिना मुकदमे या जमानत के जेलों में बंद हैं। उन्होंने कुछ राजनीतिक बंदियों की हिरासत में मौत होने का भी दावा किया और इसे न्यायिक प्रक्रिया से बाहर की गई कार्रवाई बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को जेल के बाहर लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन पुलिस आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही।
जॉय के अनुसार, अवामी लीग के प्रति सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों, संपादकों और मीडिया संस्थानों के मालिकों को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम से पहले खुफिया अधिकारियों ने भारतीय मीडिया संस्थानों से संपर्क कर इसकी कवरेज रोकने की कोशिश की।
बांग्लादेश सरकार ने कार्यक्रम पर जताई नाराजगी
बांग्लादेश सरकार ने नई दिल्ली में आयोजित शेख हसीना के कार्यक्रम की कड़ी आलोचना की है। ढाका का कहना है कि हसीना के बयान के प्रसारण पर दिसंबर 2024 से अदालती रोक लागू है। बांग्लादेश ने कार्यक्रम को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए भारत से भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
भारत ने जवाब में कहा कि यह एक निजी मीडिया संगठन का कार्यक्रम था और भारत सरकार न तो इसकी आयोजक थी और न ही कार्यक्रम में व्यक्त विचारों का समर्थन करती है।
अवामी लीग का पक्ष हैं जॉय के आरोप
जॉय के सभी बयान अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद हुई राजनीतिक और कानूनी कार्रवाइयों पर अवामी लीग का पक्ष प्रस्तुत करते हैं। इनमें ISI की गतिविधियों, आतंकवादियों की रिहाई, राजनीतिक बंदियों, पत्रकारों की गिरफ्तारी और हिंसा को कानूनी संरक्षण दिए जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
इनमें से कई आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र की जांच में शेख हसीना के शासन के दौरान 2024 के आंदोलन को दबाने में गंभीर और व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों की बात कही गई थी। इसलिए बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चल रही बहस में सत्ता पक्ष, विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के अलग-अलग दावों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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