प्रधानमंत्री मोदी का ओमान में भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सफल इथियोपिया यात्रा के बाद ओमान की राजधानी मस्कट पहुँचे। इथियोपिया में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के बाद, ओमान में उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं रहा। सड़कों पर हाथों में तिरंगा लिए लोगों की भीड़ उमड़ी और ‘मोदी-मोदी’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। यह दृश्य भारत-ओमान के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।
Grateful for the warm welcome in Oman. The affection and enthusiasm of the Indian community here truly reflect the enduring people-to-people bonds between India and Oman. pic.twitter.com/nYm1EF7xlK
— Narendra Modi (@narendramodi) December 17, 2025
मस्कट का ऐतिहासिक शिव मंदिर बना आकर्षण का केंद्र
ओमान की राजधानी मस्कट में स्थित एक ऐतिहासिक शिव मंदिर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अरब जगत में भारतीय विरासत और संस्कृति की मजबूत उपस्थिति का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बीच इस मंदिर का महत्व और अधिक उजागर हुआ है।
125 साल पुराना इतिहास: गुजरात से ओमान तक की आस्था
मस्कट के मुत्तरा क्षेत्र में स्थित ‘मोतीश्वर महादेव मंदिर’ को खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना करीब 125 साल पहले, यानी 1900 के आसपास हुई थी। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, गुजरात के कच्छ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाला ‘भाटिया’ व्यापारिक समुदाय 1500 के दशक में व्यापार के सिलसिले में ओमान पहुँचा था।
इन गुजराती व्यापारियों ने न केवल ओमान की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया, बल्कि अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवित रखा। इसी आस्था का प्रतीक बनकर मोतीश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हुआ, जो समय के साथ भारतीय समुदाय का प्रमुख केंद्र बन गया।
सुल्तानों से मधुर संबंध और मंदिर का नवीनीकरण
19वीं सदी में गुजराती व्यापारियों का ओमान में प्रभाव काफी बढ़ चुका था और उनके सुल्तानों के साथ बेहद सौहार्दपूर्ण संबंध थे। इसी आपसी विश्वास और सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1999 में इस मंदिर का भव्य नवीनीकरण किया गया। आज यह मंदिर मस्कट के प्रसिद्ध ‘अल आलम पैलेस’ के समीप अपनी पूरी भव्यता और आभा के साथ स्थित है।
रेगिस्तान में चमत्कार: मंदिर के कुएँ की मान्यता
ओमान जैसे रेगिस्तानी देश में, जहाँ पानी की कमी आम बात है, मोतीश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा एक चमत्कार श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करता है। मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन कुआँ भीषण गर्मी और सूखे के बावजूद कभी सूखता नहीं है। रेगिस्तानी इलाके में होने के बावजूद इस कुएँ में साल भर पर्याप्त जल बना रहता है।
स्थानीय लोग और श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं, क्योंकि आसपास कहीं भी पानी का कोई प्राकृतिक स्रोत नजर नहीं आता। महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर जब 20 हजार से अधिक श्रद्धालु मंदिर में एकत्रित होते हैं, तब भी यह कुआँ अपनी शीतलता और जलधारा बनाए रखता है।
तीन देवताओं का वास, सजीव आध्यात्मिक परंपरा
मोतीश्वर महादेव मंदिर परिसर में तीन प्रमुख देवताओं के मंदिर स्थापित हैं—श्री आदि मोतीश्वर महादेव, श्री मोतीश्वर महादेव और श्री हनुमान जी। मंदिर का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है, जहाँ मुख्य पुजारियों के साथ बड़ी संख्या में स्वयंसेवक सेवा में लगे रहते हैं।
खाड़ी देशों में सनातन परंपराओं का जीवंत केंद्र
इस मंदिर में केवल महाशिवरात्रि ही नहीं, बल्कि वसंत पंचमी, रामनवमी, हनुमान जयंती और गणेश चतुर्थी जैसे पर्व भी उसी श्रद्धा और उत्साह से मनाए जाते हैं जैसे भारत में। मंदिर प्रशासन और ओमान सरकार के बीच बेहतर समन्वय यह दर्शाता है कि एक मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद ओमान ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक स्वतंत्रता को सम्मान दिया है।
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