London में किराए के मकानों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक राष्ट्रीय मीडिया जांच में सामने आया है कि कई मकान मालिक खुलेआम धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव कर रहे हैं, जो ब्रिटेन के कड़े कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
जांच में पाया गया कि Facebook और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ‘Muslim Only’, ‘Muslim Girls Only’ और ‘Muslims Preferred’ जैसे हजारों विज्ञापन डाले जा रहे हैं। इसके अलावा ‘सिर्फ हिंदू’, ‘गुजराती बोलने वाले’ और ‘सिर्फ पंजाबी लड़के’ जैसी शर्तें भी रखी जा रही हैं।
खुलेआम भेदभाव के मामले सामने आए
रिपोर्ट के अनुसार, बार्किंग इलाके में एक व्यक्ति ने ‘Muslim Only’ कमरे के लिए संपर्क किया, लेकिन मकान मालिक ने उसे धर्म के आधार पर कमरा देने से इनकार कर दिया और बदसलूकी करते हुए ‘Go Away’ कह दिया।

इन विज्ञापनों वाले कई सोशल मीडिया ग्रुप्स में लाखों सदस्य हैं, जहां खुलेआम धार्मिक और जातीय आधार पर लोगों का चयन किया जा रहा है।
कानून का उल्लंघन, सख्त कार्रवाई के संकेत
ब्रिटेन का Equality Act 2010 स्पष्ट रूप से कहता है कि धर्म, नस्ल या लिंग के आधार पर भेदभाव करना अवैध है। Equality and Human Rights Commission ने चेतावनी दी है कि ऐसे विज्ञापन देने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स पर एक्शन
जांच के बाद ‘रोशन प्रॉपर्टीज’ जैसी कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जो इस तरह के विज्ञापन चला रही थीं। शिकायत मिलने के बाद फेसबुक ने कई पेज और विज्ञापन हटा दिए हैं।
इसके अलावा Gumtree जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भी कहा है कि वे भेदभावपूर्ण कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं।
यूके सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि रेंटल मार्केट में इस तरह का धार्मिक या जातीय भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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