भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को प्रतिष्ठित ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026’ से सम्मानित किया गया है।
उन्हें यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान 3 अगस्त 2026 को इटली के फ्लोरेंस शहर में आयोजित 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली के दौरान प्रदान किया गया। यह पदक विकासशील देशों में अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम यह सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक और कुल मिलाकर चौथी भारतीय वैज्ञानिक बन गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह दुनिया की तीसरी महिला वैज्ञानिक हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित पदक से सम्मानित किया गया है।
सम्मान मिलने पर जताई खुशी
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी खुशी जाहिर की और समारोह की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि फ्लोरेंस में विक्रम साराभाई मेडल 2026 प्राप्त करके वह बेहद प्रसन्न हैं।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान तारकीय आबादी, ब्लू स्ट्रैगलर तारों, AstroSat के UVIT उपकरण, भविष्य की दूरबीन परियोजनाओं और अंतरिक्ष अनुसंधान के अन्य क्षेत्रों में उनके योगदान को मान्यता देता है।
किन उपलब्धियों के लिए मिला सम्मान?
प्रोफेसर सुब्रमण्यम का शोध मुख्य रूप से तारों के विकास, तारा समूहों, मैगेलैनिक क्लाउड्स और आकाशगंगाओं की तारकीय आबादी पर केंद्रित रहा है।
उन्होंने पुराने तारा समूहों में पाए जाने वाले असामान्य रूप से गर्म और अपेक्षाकृत युवा दिखाई देने वाले ‘ब्लू स्ट्रैगलर स्टार्स’ के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शोध से इन रहस्यमय तारों की उत्पत्ति और विकास को समझने के लिए वैज्ञानिक समुदाय को नया दृष्टिकोण मिला।
भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला AstroSat के प्रमुख पेलोड अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप यानी UVIT की कैलिब्रेशन प्रक्रिया में भी उनकी अहम भूमिका रही। इस उपकरण की मदद से वैज्ञानिक पराबैंगनी प्रकाश में तारों, आकाशगंगाओं और ब्रह्मांडीय घटनाओं का अध्ययन कर सके।
वह अंतरराष्ट्रीय थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना से जुड़े भारत के वैज्ञानिक प्रयासों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।
विक्रम साराभाई मेडल पाने वाली चौथी भारतीय
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम से पहले तीन भारतीय वैज्ञानिकों को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल मिल चुका है।
- प्रोफेसर यूआर राव – 1996
- गुरबक्ष सिंह लखीना – 2014
- प्रोफेसर अनिल भारद्वाज – 2024
- प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम – 2026
पूर्व ISRO अध्यक्ष प्रोफेसर यूआर राव यह पदक प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे। गुरबक्ष सिंह लखीना को स्पेस प्लाज्मा और स्पेस वेदर फिजिक्स में योगदान के लिए सम्मानित किया गया था, जबकि प्रोफेसर अनिल भारद्वाज को अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रह अन्वेषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2024 में यह सम्मान मिला।
कौन हैं प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम?
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम का जन्म केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ। उन्होंने पलक्कड़ के विक्टोरिया कॉलेज से फिजिक्स में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु से स्टार क्लस्टर और तारकीय विकास विषय पर पीएचडी पूरी की।
उन्होंने 1990 के दशक में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान में रिसर्च फेलो के रूप में अपनी वैज्ञानिक यात्रा शुरू की। लगातार शोध और उपलब्धियों के बाद वह प्रोफेसर बनीं और बाद में संस्थान के इतिहास में पहली महिला निदेशक बनने का गौरव हासिल किया। वह वर्तमान में IIA की निदेशक हैं और स्टार क्लस्टर, तारकीय विकास तथा मैगेलैनिक क्लाउड्स जैसे क्षेत्रों में शोध करती हैं।
वैज्ञानिक उपलब्धियों के अलावा उन्हें संगीत में भी रुचि है और वह कर्नाटक संगीत की कुशल वायलिन वादक हैं।
Congratulations to Prof. Annapurni Subramaniam, Director of IIA, the recipient of the COSPAR Vikram Sarabhai Medal for 2026, "in recognition of her outstanding contributions to Space Research in developing countries".@IndiaDST @DrJitendraSingh @fiddlingstars @ISRO @CosparHQ pic.twitter.com/naIdgz6ILB
— IIAstrophysics (@IIABengaluru) August 4, 2026
2024 में मिला था ‘विज्ञान श्री’ सम्मान
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को वर्ष 2024 में भारत सरकार ने अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘विज्ञान श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया था।
वह इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की फेलो होने के साथ-साथ इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन की सक्रिय सदस्य भी हैं।
मां ने दी थी सूरज पर शोध करने की सलाह
प्रोफेसर सुब्रमण्यम ने एक साक्षात्कार में अपने बचपन का दिलचस्प किस्सा साझा किया था। उन्हें बचपन से तारों और रात के आसमान को देखने का शौक था। हालांकि उनके माता-पिता दूरदराज की वेधशालाओं में रात के समय काम करने को लेकर चिंतित रहते थे।
उनकी मां ने मजाक में उन्हें सूरज पर शोध करने की सलाह दी थी, ताकि उन्हें रात में काम न करना पड़े। लेकिन अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम तारों के रहस्यों को समझने के लिए पहले ही दृढ़ संकल्पित हो चुकी थीं।
भारत के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम का यह सम्मान भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ महिला वैज्ञानिकों के लिए भी ऐतिहासिक उपलब्धि है। उनका सफर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
केरल के पलक्कड़ से शुरू हुई उनकी यात्रा भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के सर्वोच्च पद और फिर फ्लोरेंस के वैश्विक मंच तक पहुंची। उनकी उपलब्धि देश की उन लाखों छात्राओं को प्रेरणा देती है, जो अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
Extremely happy to receive the Vikram Sarabhai Medal 2026 in Florence.@IIABengaluru @IndiaDST @isro pic.twitter.com/xtUt2Zi9Ci
— Annapurni Subramaniam (@fiddlingstars) August 3, 2026
COSPAR क्या है?
COSPAR का पूरा नाम Committee on Space Research है। इसकी स्थापना 1958 में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अपने निष्कर्षों, जानकारियों और तकनीकी उपलब्धियों के आदान-प्रदान के लिए वैश्विक मंच प्रदान करता है।
COSPAR की साइंटिफिक असेंबली हर दो वर्ष में आयोजित होती है, जिसमें दुनिया भर के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान हिस्सा लेते हैं। 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली का आयोजन इटली के फ्लोरेंस में किया गया।
क्या है COSPAR विक्रम साराभाई मेडल?
विक्रम साराभाई मेडल की स्थापना वर्ष 1990 में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में की गई थी।
यह पदक COSPAR और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है। यह सम्मान विशेष रूप से उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिन्होंने विकासशील देशों में अंतरिक्ष अनुसंधान को आगे बढ़ाने में असाधारण योगदान दिया हो।
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