ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट ने दक्षिण एशिया के कई देशों को भारत की ओर मदद के लिए देखने पर मजबूर कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, वहीं मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने के कारण क्षेत्र में ईंधन की भारी किल्लत देखी जा रही है।
भारत बना ‘संकटमोचक’
इस संकट के बीच भारत एक भरोसेमंद सप्लायर और क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मदद का फैसला घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।
नेपाल: गैस संकट गहराया
नेपाल, जो एलपीजी के लिए लगभग पूरी तरह भारत पर निर्भर है, ने अतिरिक्त सप्लाई की मांग की है।
- मौजूदा सप्लाई: ~48,000 टन/माह
- अतिरिक्त मांग: 3,000 टन
- स्थिति: गैस राशनिंग, आधा सिलेंडर नीति लागू
श्रीलंका: भारत ने बढ़ाया हाथ
श्रीलंका को भारत ने 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की है।
यह फैसला नरेंद्र मोदी और अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच बातचीत के बाद लिया गया।
- स्कूल-कॉलेज बंद
- ट्रांसपोर्ट सेवाएं सीमित
- ईंधन बचाने के लिए साप्ताहिक अवकाश
बांग्लादेश: डीजल की मांग बढ़ी
बांग्लादेश ने भी भारत से डीजल सप्लाई बढ़ाने की मांग की है।
- वार्षिक सप्लाई: ~1.8 लाख टन
- अतिरिक्त सप्लाई पाइपलाइन से भेजी गई
- हालात: यूनिवर्सिटी बंद, पेट्रोल लिमिट लागू
राजनीतिक तनाव के बावजूद यह संकट ढाका को फिर से भारत के करीब ला रहा है।
मालदीव: ओमान से हटकर भारत की ओर
मालदीव, जो आमतौर पर ओमान से ईंधन लेता है, अब भारत से मदद मांग रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण सप्लाई बाधित हो गई है और भारत के साथ शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म सप्लाई पर बातचीत जारी है।
अन्य देश भी संपर्क में
मॉरीशस और सेशेल्स भी भारत के संपर्क में हैं, हालांकि अभी औपचारिक मांग नहीं की गई है।
भारत के सामने चुनौती
भारत के लिए यह स्थिति:
- एक रणनीतिक अवसर है
- लेकिन ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना बड़ी चुनौती भी है
विदेश मंत्रालय के अनुसार:
- खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय सुरक्षित हैं
- अब तक 8 भारतीयों की मौत, 1 लापता
भारत, ईरान समेत अन्य देशों से बातचीत कर अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट के बीच भारत एक “Net Security Provider” और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर सकता है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण सभी देशों की जरूरतें पूरी करना संभव नहीं होगा।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel