पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी आज 98 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह-सुबह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर शुभकामनाएँ दीं। पीएम मोदी ने लिखा कि आडवाणी जी एक दूरदर्शी, बुद्धिमान और सिद्धांतों पर अडिग नेता हैं, जिनका पूरा जीवन भारत की प्रगति को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने निस्वार्थ भाव से राष्ट्र के लिए काम किया और भारत के लोकतांत्रिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य पर उनका योगदान अमिट छाप छोड़ता है। प्रधानमंत्री ने उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना भी की।
Greetings to Shri LK Advani Ji on his birthday. A statesman blessed with towering vision and intellect, Advani Ji’s life has been dedicated to strengthening India’s progress. He has always embodied the spirit of selfless duty and steadfast principles. His contributions have left…
— Narendra Modi (@narendramodi) November 8, 2025
1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद लालकृष्ण आडवाणी सबसे लंबे समय तक पार्टी अध्यक्ष पद पर रहने वाले नेता हैं। तीन दशक से अधिक समय तक सांसद रहने के बाद उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में गृह मंत्री और बाद में उप-प्रधानमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आडवाणी ने 1986–1990, 1993–1998 और 2004–2005 के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया।
आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वह कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल में पढ़े और किशोरावस्था से ही देशभक्ति के भाव से प्रेरित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए। मात्र 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने देश सेवा का संकल्प लेते हुए अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन आडवाणी आजादी का जश्न तक नहीं मना सके। आजादी के कुछ ही घंटे बाद उन्हें अपने घर-परिवार सहित सिंध छोड़कर भारत आना पड़ा। पाकिस्तान से भारत के लिए यह कठिन यात्रा उन्होंने धैर्य और दृढ़ता के साथ पूरी की। इसके बाद वे राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों—अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी और झालावार—में आरएसएस को संगठित करने में जुट गए।
1980 से 1990 के बीच आडवाणी ने बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में पूरा समय दिया। उनके नेतृत्व में 1984 में मात्र 2 लोकसभा सीटें जीतने वाली पार्टी 1989 में 86 सीटों तक पहुँची। 1992 में पार्टी 121 सीटों पर और 1996 में 161 सीटों पर पहुँचकर भारतीय राजनीति का प्रमुख स्तंभ बन गई। स्वतंत्रता के बाद पहली बार कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई और बीजेपी सबसे बड़ा दल बनकर उभरा—इस यात्रा का बड़ा श्रेय आडवाणी के नेतृत्व को जाता है।

एलके आडवाणी का राजनीतिक सफर (संक्षिप्त कालक्रम)
1936–1942 – कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल में शिक्षा, 10वीं तक क्लास में टॉप
1942 – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल
1942 – भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिडूमल नेशनल कॉलेज में प्रवेश
1944 – कराची के मॉडल हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में काम
12 सितंबर 1947 – बंटवारे के बाद सिंध से दिल्ली के लिए रवाना
1947–1951 – राजस्थान में आरएसएस का विस्तार किया
1957 – अटल बिहारी वाजपेयी की सहायता के लिए दिल्ली स्थानांतरण
1958–63 – दिल्ली जनसंघ में सचिव
1960–1967 – जनसंघ के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइज़र’ से जुड़े
25 फरवरी 1965 – कमला आडवाणी से विवाह; दो संतान– प्रतिभा एवं जयंत
अप्रैल 1970 – राज्यसभा में प्रवेश
दिसंबर 1972 – भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने
26 जून 1975 – आपातकाल के दौरान बैंगलोर में गिरफ्तार
1977–1979 – सूचना एवं प्रसारण मंत्री
1980–86 – बीजेपी के महासचिव
मई 1986 – बीजेपी अध्यक्ष नियुक्त
3 मार्च 1988 – फिर से अध्यक्ष बने
1988 – गृह मंत्री बने
1990 – सोमनाथ से अयोध्या राम मंदिर रथयात्रा
1997 – स्वर्ण जयंती रथ यात्रा
अक्टूबर 1999 – मई 2004 – गृह मंत्री, केंद्रीय कैबिनेट
जून 2002 – मई 2004 – उप-प्रधानमंत्री
2004–2005 – फिर बीजेपी अध्यक्ष
2009 – एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
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