मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब समुद्री व्यापार पर गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में करीब 3000 जहाज फंस गए हैं, जिन पर सवार लगभग 20,000 नाविकों की जान खतरे में है।
संकट में फंसे नाविक
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- कई जहाजों पर खाना और पीने का पानी खत्म होने की कगार पर है
- नाविक लगातार मदद के लिए संदेश भेज रहे हैं
- हेल्पलाइन टीमों पर अत्यधिक दबाव
इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) के अनुसार, नाविकों से अब तक 1000 से ज्यादा ईमेल और मैसेज मिल चुके हैं।
मदद की गुहार और डर का माहौल
नाविकों ने अपने संदेशों में बताया:
- “हम बमबारी के बीच फंसे हैं, हमें यहां से निकालिए”
- जहाजों के पास हमलों के वीडियो भी साझा किए गए
- कई क्रू मेंबर्स की सेहत खराब
ITF के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर मोहम्मद अरराचेदी ने बताया कि हालात बेहद असामान्य हैं और हर तरफ डर का माहौल है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में हजारों नाविक फंसे हुए हैं।
- अब तक कम से कम 8 नाविक/मजदूरों की मौत
- लगातार बढ़ता खतरा
- सुरक्षित निकासी की जरूरत
कम वेतन भी बड़ी समस्या
ITF के मुताबिक:
- 50% शिकायतें वेतन से जुड़ी हैं
- कई नाविक सिर्फ 16 डॉलर (लगभग ₹1500) रोजाना पर काम कर रहे हैं
- युद्ध क्षेत्र में होने के बावजूद वेतन में बढ़ोतरी नहीं
कई नाविक जहाज छोड़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे।
किन देशों के नाविक प्रभावित?
इस संकट में फंसे नाविक मुख्य रूप से:
- भारत
- फिलीपींस
- बांग्लादेश
- म्यांमार
- इंडोनेशिया
जैसे देशों से हैं।
वैश्विक व्यापार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहाँ संकट बढ़ने से:
- वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित
- तेल और गैस की कीमतों पर दबाव
- समुद्री व्यापार में अनिश्चितता
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