पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाए जाने की घटना पर Supreme Court of India ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने इस घटना को ‘पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित’ प्रयास करार देते हुए कहा कि इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का मनोबल तोड़ना था।
गुरुवार (02 अप्रैल 2026) को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे एडवोकेट जनरल से सख्त लहजे में कहा, “दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। यह सबसे ज्यादा विभाजित राज्य है। हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं, मैं रात 2 बजे तक इस मामले की निगरानी कर रहा था।”
अदालत ने इस घटना को ‘बेशर्म प्रयास’ बताते हुए स्पष्ट किया कि कानून को हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों के बीच डर का माहौल बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की घटनाएं आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकती हैं।
#WATCH | मालदा, पश्चिम बंगाल: मालदा में मतदाता सूची में नाम न आने को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा, "कल बहुत ही चिंताजनक घटना घटी। 7 न्यायिक पदाधिकारियों को बंधक बना लिया गया और जब SP उनके बचाव का… pic.twitter.com/RTQQ4K1AWc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 2, 2026
प्रशासन पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब पहले से स्थिति की जानकारी थी, तो अधिकारियों की सुरक्षा और सुरक्षित निकासी के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
क्या है पूरा मामला?
घटना Malda जिले की है, जहां मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में उग्र भीड़ ने BDO कार्यालय में 7 न्यायिक अधिकारियों को करीब 8 घंटे तक बंधक बना लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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