झारखंड में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ गई है। आंदोलनरत छात्रों ने सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार कर लिया है। हालांकि, सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्रों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों के समाधान के लिए राज्य सरकार से बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन वार्ता बंद कमरे में नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ सीधे बातचीत और बैठक में मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी की मांग की है। मुख्यमंत्री की ओर से अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।
बैठक की जगह और समय का इंतजार
सरकार की ओर से बातचीत के लिए स्थान और समय की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। छात्रों के मुताबिक, सरकार का जवाब मिलने और प्रतिनिधिमंडल के नाम सौंपे जाने के बाद बैठक आयोजित हो सकती है।
छात्र नेताओं ने बताया कि बुधवार रात हुई बैठक में सरकार के साथ बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद छात्रों ने साफ किया कि वार्ता पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और उसकी जानकारी मीडिया तथा आंदोलन में शामिल अन्य अभ्यर्थियों से नहीं छिपाई जानी चाहिए।
आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच बातचीत कराने के प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं, जब रांची में JPSC, JSSC-CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन लगातार जारी है।
सरकार के सामने छात्रों ने रखीं दो प्रमुख शर्तें
प्रदर्शनकारी छात्रों ने वार्ता के लिए दो मुख्य शर्तें रखी हैं।
पहली शर्त यह है कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो। छात्रों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री की मौजूदगी का भरोसा दिलाया गया है।
दूसरी शर्त यह है कि बैठक में कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों को मौजूद रहने दिया जाए। छात्रों का तर्क है कि मीडिया के सामने बातचीत होने से सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों और फैसलों का सार्वजनिक रिकॉर्ड रहेगा।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पहले भी छात्र प्रतिनिधियों को बंद कमरे में बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन उससे कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इसी अनुभव को देखते हुए छात्र इस बार खुली और पारदर्शी बातचीत की मांग कर रहे हैं।
‘बंद कमरों में दब जाती है छात्रों की आवाज’
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि झारखंड में लंबे समय से छात्रों की शिकायतें बंद कमरों में सुनी जाती रही हैं, लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। छात्रों ने मांग की कि मुख्यमंत्री मीडिया के सामने उनकी समस्याएं सुनें और सरकार जो भी आश्वासन देना चाहती है, उसे सार्वजनिक रूप से घोषित करे।
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से सरकार की ओर से बातचीत का संदेश मिलने के बाद छात्रों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से ही निकाला जा सकता है।
किन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं छात्र?
रांची में जारी आंदोलन का केंद्र JPSC और JSSC सहित झारखंड की विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, नकल, मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में देरी है।
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर और नियुक्तियों में होने वाली देरी समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कुछ छात्र विवादित परीक्षाओं की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग भी कर रहे हैं।
19 आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा
प्रतियोगी परीक्षा अनियमितता मामले में CID की जांच भी जारी है। हालिया कार्रवाई में पांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 19 तक पहुंचने की खबर है। इससे पहले CID ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर परीक्षा में कथित धोखाधड़ी और संगठित नेटवर्क से जुड़े साक्ष्य जुटाए थे।
मंत्रियों के समूह की भूमिका पर सरकार ने दी सफाई
सरकार की ओर से उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, समाज कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव के नाम आंदोलन की स्थिति पर नजर रखने वाले मंत्रियों के समूह में सामने आए हैं।
हालांकि, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने छात्रों से औपचारिक बातचीत करने के लिए कोई अलग समिति गठित नहीं की है। उनके अनुसार, मंत्रियों का समूह आंदोलन की स्थिति की निगरानी कर रहा है और उसे औपचारिक वार्ता का दायित्व नहीं सौंपा गया है।
वहीं, मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार ने बातचीत का रास्ता खोल दिया है और वह छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए तैयार है।
बातचीत से निकलेगा आंदोलन का समाधान?
सरकार की ओर से संवाद का प्रस्ताव और छात्रों द्वारा प्रतिनिधिमंडल तैयार किया जाना गतिरोध समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक का अंतिम प्रारूप, समय, स्थान और मीडिया की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि वार्ता वास्तव में शुरू हो पाएगी या नहीं।
छात्रों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे संवाद के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस बार केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं करेंगे। उनका जोर पारदर्शी बातचीत, समयबद्ध कार्रवाई और सरकार के वादों को सार्वजनिक किए जाने पर है।
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