पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच टकराव अब गंभीर स्तर पर पहुँच गया है। I-PAC दफ्तर में हुई छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर जाँच प्रक्रिया में बाधा डाली और ED अधिकारियों को डराया-धमकाया।
ED सूत्रों के अनुसार, जब एजेंसी की टीम I-PAC कार्यालय में जाँच कर रही थी, तभी अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुँचीं। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने गवाह प्रतीक जैन का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
एजेंसी का यह भी दावा है कि मौके पर मौजूद पश्चिम बंगाल के DGP ने तीन ED अधिकारियों को सीधे तौर पर धमकी दी। ED के मुताबिक, DGP ने कहा कि पंचनामा में किसी भी तरह की बरामदगी न दिखाने की चेतावनी दी गई और ऐसा न करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
ED ने कोर्ट को बताया कि उस समय मौके पर एजेंसी के केवल तीन अधिकारी मौजूद थे, जबकि बड़ी संख्या में राज्य पुलिस बल तैनात था। इस दौरान कथित तौर पर ED से सबूत छीने गए और डिजिटल डेटा नष्ट कर दिया गया, जिसे एजेंसी ने कानून का खुला उल्लंघन बताया है।
इन आरोपों के आधार पर ED ने हाई कोर्ट से पूरे मामले की CBI जाँच कराने और कथित रूप से छीने गए दस्तावेजों व डिजिटल सबूतों को वापस दिलाने की माँग की है। एजेंसी का कहना है कि निष्पक्ष जाँच और कानून के राज को बनाए रखने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
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