अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार, 19 जनवरी 2026 की शाम फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। ट्रंप ने कहा कि यह कदम फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव बनाने के लिए है, ताकि वे उनके प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हों। ट्रंप के मुताबिक इस बोर्ड का उद्देश्य दुनिया भर के संघर्षों को सुलझाना और खास तौर पर गाजा में शांति स्थापित करना है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर मैक्रों के साथ हुई चैट का एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इस मैसेज के अनुसार, मैक्रों ने दावोस के दौरान गुरुवार को पेरिस में G7 बैठक करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस के प्रतिनिधियों को भी इस बैठक में बुलाया जा सकता है। मैक्रों के कार्यालय ने ट्रंप द्वारा पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता की पुष्टि की है, हालांकि अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर मैक्रों को कोई औपचारिक जवाब दिया या नहीं।

इससे पहले भी ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर फ्रांस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल नहीं होता है, तो फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा। हालांकि फ्रांस ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति मैक्रों इस प्रस्तावित बोर्ड का हिस्सा नहीं बनेंगे। फ्रांस का कहना है कि उसे आशंका है कि ट्रंप की अध्यक्षता वाली यह बॉडी गाजा पट्टी की ट्रांजिशनल गवर्नेंस से कहीं ज्यादा शक्तियों का इस्तेमाल करेगी, जिससे संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
मैक्रों का यह रुख यूरोप में बनी असहजता को भी दर्शाता है। कई यूरोपीय देश इस बात को लेकर उलझन में हैं कि ट्रंप के प्रस्ताव पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए। एक ओर खुलकर मना करने से अमेरिका के नाराज होने का खतरा है, तो दूसरी ओर बिना शर्त शामिल होने पर घरेलू राजनीति में नुकसान हो सकता है। इसी वजह से कई नेता फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाए हुए हैं।
इस बीच ट्रंप ने देशों से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की परमानेंट मेंबरशिप के लिए 1 बिलियन डॉलर यानी करीब 8,300 करोड़ रुपये देने की मांग भी की है। व्हाइट हाउस ने इस मांग की पुष्टि की है। इस शर्त ने कई देशों के नेताओं को चौंका दिया है। उनका कहना है कि यह फीस किन उद्देश्यों के लिए होगी और इस फंड पर नियंत्रण किसका रहेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
बताया जा रहा है कि पिछले साल इस बोर्ड को लेकर चर्चा हुई थी कि यह जंग खत्म होने के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए ट्रंप की अगुवाई में काम करने वाली संस्था होगी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन सहित कई वैश्विक नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता भेजा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ट्रंप की ओर से गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया है।
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