पूर्वी महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के अनंत उर्फ़ विनोद सय्यना के नेतृत्व वाले दरेकसा दलम के 11 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था। गढ़चिरौली रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) अंकित गोयल ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली दरेकसा दलम से जुड़े थे, जिसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (MMC) क्षेत्र का सबसे सक्रिय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यूनिट माना जाता था। इनमें सबसे बड़ा नाम विकास नागपुरे उर्फ़ अनंत का है, जो दरेकसा स्पेशल जोनल कमेटी और राजनांदगाँव–गोंदिया–बालाघाट डिविजन का प्रमुख था। अनंत पर अकेले 25 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।
#WATCH | Gadchiroli, Maharashtra | Special Zonal Committee member Vikas Nagpure, alias Anant, and 11 Naxalites have surrendered before the Gondia Police. All the surrendered Naxalites carried a combined bounty of Rs 89 lakh on their head. They also surrendered a stock of seven… pic.twitter.com/s2GLOrMTm2
— ANI (@ANI) November 28, 2025
पीएलजीए यूनिट का यह सामूहिक आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है जब MMC विशेष संभागीय समिति ने 1 जनवरी 2026 तक दूसरी शांति अपील जारी की थी। इस अपील के महज अगले ही दिन पूरा दरेकसा दलम गोंदिया में पुलिस के सामने हथियार डालने पहुँच गया। इससे पहले अनंत ने तीनों राज्यों—महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश—के मुख्यमंत्रियों और गृह मंत्रियों को पत्र लिखकर सुरक्षा अभियान को 34 दिनों के लिए रोकने की अपील की थी, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे नक्सली एक साथ सरेंडर कर सकें। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और संयुक्त ऑपरेशन जारी रखा।
#WATCH | Gadchiroli, Maharashtra | Deputy Inspector General of Police, Gadchiroli Range, Ankit Goyal, said, "About 7-8 days ago, the spokesperson for the Maoist MMC zone, Madhya Pradesh, Maharashtra, and Chhattisgarh, expressed his desire to surrender. In this series, he had… pic.twitter.com/qzl2xosZLX
— ANI (@ANI) November 28, 2025
अधिकारियों के अनुसार यह आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ा मोड़ साबित होगा। लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव, विकास कार्यों की पहुँच और सरकार की शांति अपील ने दरेकसा यूनिट को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर किया। उनका मानना है कि इस कदम से MMC क्षेत्र में नक्सलियों के नेटवर्क को गहरी चोट पहुँचेगी और आने वाले समय में इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में और कमी देखने की संभावना है।
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