केरल हाई कोर्ट ने त्रिशूर जिले में चल रहे एक प्राइवेट स्कूल को बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि स्कूल बिना राज्य सरकार की मान्यता के संचालित हो रहा था और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 का उल्लंघन कर रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्कूल में करीब 300 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था, जहां धार्मिक शिक्षा के तौर पर कुरान की पढ़ाई भी कराई जा रही थी।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस हरिशंकर वी मेनन की बेंच ने शुक्रवार (07 फरवरी 2026) को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के समाप्त होने तक स्कूल को अस्थायी रूप से चलने दिया जा सकता है, ताकि छात्रों और उनके अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसके बाद स्कूल को बंद करना सुनिश्चित किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि संबंधित संस्थान के पास RTE एक्ट की धारा 18 के तहत आवश्यक मान्यता नहीं थी। कानून के अनुसार, किसी भी स्कूल को संचालन के लिए राज्य सरकार से मान्यता लेना अनिवार्य है। बिना मान्यता के शिक्षा संस्थान चलाना RTE अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है।
स्कूल प्रशासन ने अपनी ओर से दलील दी कि उनके पास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) की मान्यता है, इसलिए उन्हें बंद नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NIOS की मान्यता RTE एक्ट के तहत मिलने वाली राज्य मान्यता का विकल्प नहीं हो सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मान्यता प्राप्त स्कूलों को एकतरफा धार्मिक शिक्षा देने के लिए राज्य सरकार की विशेष अनुमति आवश्यक होती है। चूंकि संबंधित स्कूल इन नियमों का पालन नहीं कर रहा था, इसलिए अदालत ने इसे अवैध मानते हुए बंद करने का आदेश दिया।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel