नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इस कड़ी में पुलिस ने दो और आरोपितों हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपितों की भूमिका प्रदर्शन के दौरान भीड़ को भड़काने और हिंसा फैलाने में अहम थी। तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद के संपर्क में थे। घटना के दिन हिमांशु ठाकुर नोएडा में मौजूद था और लगातार आदित्य के संपर्क में था।
इससे पहले पुलिस ने इस मामले के मास्टरमाइंड माने जा रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद को तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज है और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।

साजिश और नेटवर्क की जांच तेज
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हिंसा केवल स्थानीय घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी और सुनियोजित साजिश हो सकती है। पुलिस को आदित्य के ठिकाने से कुछ दस्तावेज और नोट्स मिले हैं, जिनमें श्रमिक आंदोलन को उग्र बनाने की रणनीति के संकेत मिले हैं।
इसके अलावा यह भी खुलासा हुआ है कि बाहरी राज्यों से कुछ लोगों को इस आंदोलन को भड़काने के लिए बुलाया गया था। अब STF इस पूरे मामले में फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट के स्रोतों की गहन जांच कर रही है।
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