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पंजाब में AAP को बड़ा झटका, 48 घंटे में 3 विधायक बीजेपी में शामिल

AAP के तीन विधायक हरमीत पठानमाजरा, चेतन जोड़ामाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह बीजेपी में शामिल। केजरीवाल और भगवंत मान पर लगाए गंभीर आरोप।

पंजाब में AAP को बड़ा झटका, 48 घंटे में 3 विधायक बीजेपी में शामिल

पंजाब की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन विधायकों ने पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। पटियाला जिले के सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा, समाना से विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा तथा अमृतसर नॉर्थ से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने 2 नवंबर 2026 को दिल्ली में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इन नेताओं के पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की खबरों से पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

तीनों नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने तो यहां तक दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अपना राजनीतिक आधार खो चुकी है। वहीं, हरमीत सिंह पठानमाजरा ने राज्य की कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार की आलोचना की।

दो दिनों में AAP के तीन विधायकों ने छोड़ी पार्टी

पंजाब में आम आदमी पार्टी को पहला बड़ा झटका 1 नवंबर 2026 को लगा, जब पटियाला जिले के दो विधायकों के पार्टी से इस्तीफा देने की खबर सामने आई। इनमें सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक एवं पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा शामिल थे।

इसके अगले ही दिन, 2 नवंबर को अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेजा।

कुंवर विजय प्रताप सिंह को जून 2025 में आम आदमी पार्टी से पांच साल के लिए निलंबित किया गया था। वह लंबे समय से पार्टी नेतृत्व और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे थे।

दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय पहुंचे तीनों नेता

इस्तीफों के घटनाक्रम के कुछ ही समय बाद तीनों नेता दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय पहुंचे, जहां उनके बीजेपी में शामिल होने की जानकारी सामने आई।

तीनों नेताओं का बीजेपी में जाना पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी से अलग हुए इन नेताओं ने पंजाब सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

कुंवर विजय प्रताप का बड़ा बयान- ‘पंजाब में आम आदमी पार्टी खत्म हो चुकी है’

बीजेपी में शामिल होने के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी और अमृतसर नॉर्थ के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अपना राजनीतिक अस्तित्व खो चुकी है और इसके लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है।

कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने अपने फैसलों से आम आदमी पार्टी को कमजोर कर दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पंजाब में भी बीजेपी के नेतृत्व वाली ‘डबल इंजन सरकार’ बनेगी।

‘पंजाब में गैंगस्टरों का राज’- कुंवर विजय प्रताप सिंह

कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गैंगस्टरों का प्रभाव बढ़ गया है और अपराध तथा नशीले पदार्थों की समस्या गंभीर बनी हुई है।

अपने पुलिस सेवा के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह अमृतसर में पुलिस अधीक्षक के तौर पर कार्य कर चुके हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2007, 2008 और 2009 के दौरान उन्होंने अपराध और नशे की समस्या पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई की थी।

उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल के बाद अपराध और नशीले पदार्थों की स्थिति फिर बिगड़ गई। कुंवर विजय प्रताप ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों का राजनीतिक अनुभव उनके लिए बेहद कठिन रहा है।

हरमीत सिंह पठानमाजरा ने AAP नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी में शामिल होने के बाद सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि जब आम आदमी पार्टी पहली बार पंजाब की राजनीति में आई थी, तब उसने राज्य के विकास और व्यवस्था परिवर्तन का प्रभावशाली विजन प्रस्तुत किया था। इसी सोच और वादों के आधार पर पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिला और पंजाब में उसकी सरकार बनी।

हालांकि, पठानमाजरा ने आरोप लगाया कि समय बीतने के साथ पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से दूर होती चली गई। उन्होंने कहा कि पंजाब की समस्याओं पर खुलकर बोलने वाले नेताओं की आवाज दबाई गई और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं मिला।

‘उड़ता पंजाब नहीं, उभरता पंजाब बनाना चाहते हैं’

हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पंजाब में नशे की समस्या और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब को अक्सर ‘उड़ता पंजाब’ के नाम से संबोधित किया जाता है, लेकिन उनका उद्देश्य इसे ‘उभरता पंजाब’ बनाना है।

पठानमाजरा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने राज्य को आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं में धकेल दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार ने पिछली सरकारों की तुलना में अधिक कर्ज लिया है, जिससे पंजाब की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि, सरकारों के कर्ज संबंधी दावों का मूल्यांकन करने के लिए आधिकारिक बजट और वित्तीय आंकड़ों की तुलना आवश्यक है।

पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा का बीजेपी में जाना भी अहम

पंजाब की समाना विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा का आम आदमी पार्टी से अलग होकर बीजेपी में शामिल होना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जोड़ामाजरा पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना केवल एक विधायक के दल बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है।

पटियाला जिले की सनौर और समाना विधानसभा सीटों से जुड़े दोनों नेताओं के बीजेपी में जाने के बाद इस क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पंजाब में ‘डबल इंजन सरकार’ बनाने का दावा

बीजेपी में शामिल होने के बाद कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब में ‘डबल इंजन सरकार’ बनने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध पर नियंत्रण पाने और नशे की समस्या से निपटने के लिए बदलाव की आवश्यकता है।

बीजेपी में शामिल हुए नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि वे आगामी राजनीतिक मुकाबले में कानून-व्यवस्था, नशे, भ्रष्टाचार और राज्य की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकते हैं।

क्या पंजाब विधानसभा के समीकरणों पर पड़ेगा असर?

तीन विधायकों के आम आदमी पार्टी से अलग होकर बीजेपी में शामिल होने के घटनाक्रम ने पंजाब विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी विधायक के पार्टी छोड़ने, विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने और दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होने के कानूनी परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा प्रभावी होने के लिए संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया का पूरा होना जरूरी है। वहीं, दल-बदल से जुड़े मामलों में संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधान भी प्रासंगिक हो सकते हैं। ऐसे में तीनों विधायकों की विधानसभा सदस्यता की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही सदन के संख्यात्मक समीकरणों पर निश्चित निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

पंजाब की राजनीति में आगे क्या?

पंजाब में दो दिनों के भीतर आम आदमी पार्टी से जुड़े तीन विधायकों के बीजेपी में शामिल होने की खबरों ने राज्य के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

इन नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पंजाब की कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, बढ़ते कर्ज और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

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