बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जानी-मानी लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने अब राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही चुनाव लड़ेंगी और इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। मैथिली ने कहा कि वह दरभंगा या मधुबनी में से किसी एक सीट से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में आने के बावजूद उनका संगीत नहीं छूटेगा। उन्होंने कहा, “प्रभु सेवा और जनसेवा साथ-साथ चलेगी, संगीत भी जारी रहेगा।”
जब उनसे पूछा गया कि वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी, तो मैथिली ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा एक पार्टी से काफी मेल खाती है। उन्होंने कहा, “आपने मेरे गीत सुने होंगे, मेरा सनातन से लगाव देखा होगा। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि मैं किस दिशा में जा रही हूं। बस दो दिन में सारी घोषणा हो जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी प्रभावित रही हैं और उन्हें देखकर ही राजनीति में आने की प्रेरणा मिली है।
कोई शक नहीं Maithili Thakur बिहार की लोकप्रिय गायिका है और भीड़ जुटाउ भी है लेकिन ये सिर्फ और सिर्फ बिहार के सरकारी मेहमान ( सरकारी कार्यक्रम )तक सीमित होकर रह गई है । बिहार या मिथिला के किसी सामाजिक मुद्दे या विषय में कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं देखा गया है । इनके पिता रमेश ठाकुर जी… pic.twitter.com/9Ewx043QjC
— Uday Chatterjee (@UdayChatterje) October 7, 2025
सूत्रों के मुताबिक, मैथिली ठाकुर बीजेपी के टिकट पर अलीनगर सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, इस बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। माना जा रहा है कि वह दरभंगा या मधुबनी जिले की किसी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी। कुछ दिन पहले ही मैथिली ठाकुर ने बीजेपी के चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद उनके बीजेपी से जुड़ने की चर्चाएं तेज हो गईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मैथिली ठाकुर का राजनीति में आना मिथिलांचल क्षेत्र में एनडीए के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर स्वयं एक संगीतकार हैं और उन्होंने ही बचपन से मैथिली को संगीत की शिक्षा दी। मात्र 13 साल की उम्र में मैथिली ने रियलिटी शो ‘राइजिंग स्टार’ में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
उनके लोकप्रिय लोकगीतों जैसे ‘चलो बिहार के गीत गावें’ और ‘मैया मोर ला गावना आवेला’ ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वर्ष 2024 में उन्हें ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड मिला, जबकि 2023 में चुनाव आयोग ने उन्हें बिहार का ‘स्टेट आइकॉन’ घोषित किया। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने मधुबनी में पहली बार अपनी दादी और चाची के साथ मतदान किया और मतदाता जागरूकता अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। अब यही सक्रियता उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत मानी जा रही है।