अमेरिका के कानून मंत्रालय (यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर लगाया गया यह बड़ा आरोप वापस ले लिया है कि वह ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ नाम के किसी संगठन के प्रमुख हैं। यह वही कथित संगठन है, जिसे लंबे समय तक अमेरिकी प्रशासन द्वारा एक नार्को-आतंकी संगठन बताया जाता रहा था। ट्रंप प्रशासन के दौरान इस दावे को जोर-शोर से आगे बढ़ाया गया था, जब अमेरिका वेनेजुएला में मादुरो की सत्ता को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहा था।
अब अमेरिका के अभियोजक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ कोई वास्तविक या औपचारिक संगठन नहीं है। नए आरोपपत्र के अनुसार, यह शब्द असल में ड्रग तस्करी से जुड़े भ्रष्टाचार, संरक्षण और पैट्रनेज की एक व्यवस्था का प्रतीक है, न कि किसी संगठित कार्टेल का नाम। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिकी न्याय विभाग ने मादुरो पर ड्रग तस्करी की साजिश में शामिल होने के आरोप पूरी तरह से वापस नहीं लिए हैं।
Unbelievable. After months of propaganda claiming Maduro is the head of the dangerous drug-smuggling cartel, the US government has admitted it was all a ruse in order to kidnap a sitting head of state. pic.twitter.com/FgniUNrPiL
— Alan MacLeod (@AlanRMacLeod) January 6, 2026
यह मामला पहली बार वर्ष 2020 में सामने आया था, जब अमेरिकी न्याय विभाग की एक ग्रैंड जूरी ने मादुरो के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद जुलाई 2025 में अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ को आतंकी संगठन घोषित कर दिया था। नवंबर में ट्रंप प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय को भी इसी तरह की घोषणा करने के निर्देश दिए थे।
.@StateDept intends to designate Cartel de los Soles as a Foreign Terrorist Organization (FTO). Headed by the illegitimate Nicolás Maduro, the group has corrupted the institutions of government in Venezuela and is responsible for terrorist violence conducted by and with other…
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) November 16, 2025
हालांकि, लैटिन अमेरिका में अपराध और ड्रग तस्करी पर काम करने वाले विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ कोई औपचारिक संगठन नहीं, बल्कि एक बोलचाल का शब्द है। यह शब्द 1990 के दशक में वेनेजुएला के मीडिया ने उन राजनेताओं और सैन्य अधिकारियों के लिए गढ़ा था, जो कथित तौर पर ड्रग मनी से भ्रष्ट हो चुके थे। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद जारी नए आरोपपत्र में अमेरिकी न्याय विभाग ने भी इस व्याख्या को स्वीकार किया है।
नए आरोपपत्र में ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ का जिक्र केवल दो बार किया गया है। इसमें कहा गया है कि मादुरो अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज की तरह इस भ्रष्ट व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके विपरीत, पुराने आरोपपत्र में इस कथित समूह का 32 बार उल्लेख किया गया था और मादुरो को इसका सीधा प्रमुख बताया गया था।
नए दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि ड्रग तस्करी से होने वाली कमाई और तस्करों को संरक्षण देने से मिलने वाला धन भ्रष्ट नागरिक अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के लोगों तक पहुंचता है। ये सभी लोग एक ऐसे सिस्टम में काम करते हैं, जिसे ऊपर बैठे प्रभावशाली लोग नियंत्रित करते हैं। इसी व्यवस्था को ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ या ‘कार्टेल ऑफ द सन्स’ कहा जाता है। यह नाम वेनेजुएला के उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों की वर्दी पर बने सूरज के निशान से लिया गया है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की लैटिन अमेरिका मामलों की डिप्टी डायरेक्टर एलिजाबेथ डिकिंसन ने कहा कि नए आरोपपत्र में ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ को लेकर जो व्याख्या दी गई है, वह “सच्चाई के ज्यादा करीब” है। वहीं दूसरी ओर, 4 जनवरी को NBC के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में मार्को रुबियो ने एक बार फिर ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ को एक वास्तविक संगठन बताया और दावा किया कि इसका नेतृत्व मादुरो करते हैं। यह बयान नए आरोपपत्र के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद दिया गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘कार्टेल दे लॉस सोलेस’ का नाम कभी भी अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) की वार्षिक ‘नेशनल ड्रग थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। इस रिपोर्ट में दुनिया के प्रमुख ड्रग तस्करी संगठनों की सूची होती है। इसी तरह, संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) द्वारा प्रकाशित ‘वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट’ में भी इस कथित समूह का कभी कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
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