गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद की DCB क्राइम ब्रांच में दर्ज एक FIR से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने दहेज की मांग, शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न और गंभीर यौन शोषण जैसे आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए साफ कहा कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी सहमति सबसे अहम है और किसी की इच्छा के खिलाफ बनाए गए शारीरिक संबंध स्वीकार्य नहीं हैं।
यह मामला एक महिला की शिकायत पर आधारित है, जिसमें उसने अपने पति के साथ-साथ सास और ससुर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार उसकी शादी साल 2022 में गुरुग्राम के एक बिजनेसमैन से हुई थी। यह उसकी पहली शादी थी, जबकि पति की यह दूसरी शादी बताई गई है। शिकायत में महिला ने दावा किया कि शादी के बाद से ही उसे लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
महिला का आरोप है कि पति उसकी मर्जी के खिलाफ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता था, उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध करता था और उसके निजी अंगों को सिगरेट से जलाने जैसी क्रूर हरकतें करता था। पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपी की पहली पत्नी ने भी उसके खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए थे।
गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 482 के तहत गुजरात हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की। आरोपी ने खुद को गुरुग्राम का जाना-माना कारोबारी बताते हुए सभी आरोपों को झूठा करार दिया और कहा कि यह पूरा मामला केवल वैवाहिक विवाद का नतीजा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस दिव्येश ए. जोशी की बेंच ने आरोपों को गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आज के कानून में व्यक्ति के शरीर पर उसका अधिकार और उसकी सहमति सर्वोपरि है, चाहे संबंध पति-पत्नी के बीच ही क्यों न हो।
कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंध तभी उचित माने जा सकते हैं जब वे दोनों पक्षों की सहमति और आपसी सम्मान के साथ हों। किसी की इच्छा के विरुद्ध बनाए गए संबंध न केवल शरीर बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गहरी चोट पहुंचाते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी की पहली पत्नी ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि कोई भी महिला बिना ठोस कारण के ऐसे गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से नहीं लगाती। आरोपों की गंभीरता और जांच के लिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने आरोपी पति को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
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