गुजरात के सूरत में 14 मार्च को आयोजित होने वाले एक भव्य सामूहिक विवाह समारोह के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यशवी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में एक मुस्लिम युवती और हिंदू युवक के विवाह को लेकर मुस्लिम समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद आखिरकार फाउंडेशन ने यह विवाह रद्द करने की घोषणा कर दी है।
101 बेटियों के सामूहिक विवाह में उठा विवाद
यशवी फाउंडेशन द्वारा डुमस रोड स्थित राजघराना पार्टी प्लॉट में 101 पिताविहीन और जरूरतमंद बेटियों के लिए सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया जा रहा है।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर यह जानकारी सामने आई कि इस कार्यक्रम में एक मुस्लिम युवती अपने हिंदू प्रेमी से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करने वाली है। यह खबर सामने आते ही मुस्लिम समाज में नाराजगी फैल गई और मामला प्रशासन तक पहुंच गया।
मुस्लिम समाज की कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर से शिकायत
दक्षिण गुजरात मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस मामले में जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी। उन्होंने गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम 2021 का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करना हो तो पहले जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य है।


समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि सामूहिक विवाह मंच से इस तरह का अंतरधार्मिक विवाह कराना कानून का उल्लंघन हो सकता है और इससे शहर के सामाजिक माहौल पर असर पड़ सकता है।
फाउंडेशन के CEO ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद फाउंडेशन के CEO सत्येन नायक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने बताया कि मुस्लिम युवती अपनी मां की सहमति से हिंदू युवक से विवाह करने वाली थी, लेकिन 27 फरवरी को दोनों ने फाउंडेशन को जानकारी दी कि युवती के परिवारजन अब इस विवाह के लिए तैयार नहीं हैं।
हालांकि युवक और युवती अभी भी विवाह करना चाहते हैं, लेकिन परिवार की असहमति के कारण ट्रस्ट ने इस विवाह को रद्द करने का निर्णय लिया है।
नए विवाह पंजीकरण कानून का भी हवाला
फाउंडेशन ने अपने बयान में यह भी कहा कि नए विवाह पंजीकरण नियमों के अनुसार यदि प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति नहीं होती, तो कई मामलों में कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए फाउंडेशन ने अंतरधार्मिक विवाह का फॉर्म रद्द कर दिया।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज सेवा के तहत जरूरतमंद बेटियों के विवाह कराना है।
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