नरेंद्र मोदी आज असम के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने डिब्रूगढ़ जिले के चबुआ हवाई क्षेत्र का दौरा किया। इसके बाद वह भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से मोरन स्थित इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पहुंचे। अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित यह विमान भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
भारत के पास कितने C-130J विमान हैं?
भारत के पास करीब एक दर्जन C-130J सैन्य परिवहन विमान हैं। पहले छह विमान 2011 में भारतीय वायुसेना को मिले थे, जबकि अगले छह विमान 2017 में डिलीवर किए गए। यह विमान कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में सैन्य ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए हैं।
डीब्रूगढ़ में पीएम मोदी और सीएम हिमंता की मौजूदगी में IAF के राफेल और AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान का प्रदर्शन
असम के डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उपस्थिति में भारतीय वायुसेना के राफेल फाइटर जेट और AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का भव्य… pic.twitter.com/Mzp8NEx5Q7
— One India News (@oneindianewscom) February 14, 2026
C-130J सुपर हरक्यूलिस की खासियतें
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लगभग 30 मीटर लंबा और 12 मीटर ऊंचा विमान
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19 टन तक भार उठाने की क्षमता
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करीब 643 किमी/घंटा की रफ्तार
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एक बार में लगभग 3,334 किमी उड़ान
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4 इंजन वाला एयरक्राफ्ट, खराब मौसम में भी सक्षम
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छोटे और ऊबड़-खाबड़ रनवे पर लैंडिंग की क्षमता
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90 यात्रियों या 64 सैनिकों को ले जाने में सक्षम
इस विमान के नाम 54 विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं और अमेरिका सहित 23 से ज्यादा देश इसका उपयोग करते हैं।
80 नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की तैयारी
भारतीय वायुसेना पुराने सोवियत दौर के AN-32 और IL-76 विमानों को बदलने के लिए करीब 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की योजना बना रही है। इस रेस में C-130J के अलावा ब्राजील की एम्ब्रेयर का KC-390 मिलेनियम और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के विमान भी शामिल हैं।
लॉकहीड मार्टिन ने प्रस्ताव दिया है कि यदि कॉन्ट्रैक्ट मिलता है, तो अमेरिका के बाहर C-130J का पहला वैश्विक प्रोडक्शन हब भारत में स्थापित किया जाएगा। कंपनी ने टाटा के साथ मिलकर बेंगलुरु में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर बनाने की घोषणा भी की है, जो 2027 तक शुरू हो सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है C-130J?
भारतीय वायुसेना को ऐसे विमान की जरूरत है जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक तापमान में बड़े पैमाने पर सैन्य साजो-सामान पहुंचा सके। C-130J टैक्टिकल एयरलिफ्ट, स्पेशल ऑपरेशंस, खुफिया मिशन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सर्च एंड रेस्क्यू जैसे कई मिशन में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विमान भारत की सामरिक क्षमता और तेज सैन्य तैनाती को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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