दिल्ली में चल रहे AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट रुख अपना लिया है। सरकार ने कहा कि किसी भी प्रदर्शक (एग्जिबिटर्स) को ऐसी चीज़ अपने नाम से दिखाने की अनुमति नहीं है जो उन्होंने खुद विकसित न की हो।
सरकार का रुख
IT सचिव एस कृष्णन ने कहा कि गलत तरीके से बनाई गई चीज़ को अपनी उपलब्धि बताना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,
“हम चाहते हैं कि एक्सपो में लोग वही असली और सच्चा काम दिखाएँ जो उन्होंने सच में किया है। यह मंच किसी और तरीके से फायदा उठाने के लिए नहीं है। इसलिए जरूरी है कि तय नियमों का पालन किया जाए।”
सरकार ने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता और प्रदर्शक केवल वास्तविक और खुद विकसित तकनीक को ही प्रदर्शित करें।
विवाद की पृष्ठभूमि
विवाद तब शुरू हुआ जब नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई समिट में एक रोबोटिक डॉग पेश किया और इसे अपनी उपलब्धि बताया। यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है।
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा कि यह रोबोट वास्तव में चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल Unitree Go2 है, जिसे ऑनलाइन खरीदा जा सकता है।
यूनिवर्सिटी की सफाई
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि यह रोबोट छात्रों के सीखने और रिसर्च के लिए खरीदा गया था, और इसे अपनी खोज बताने का इरादा नहीं था। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उनका बयान गलतफहमी में दिया गया और किसी को गुमराह करने का उद्देश्य नहीं था।
इस विवाद के बाद यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर निकाल दिया गया। इस घटनाक्रम ने AI समिट में पारदर्शिता और दावों की सच्चाई पर सवाल खड़ा किया है, जिसके कारण केंद्र सरकार ने अब सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है।
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