पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और Arvind Kejriwal ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका संविधान के Article 32 of the Constitution of India के तहत दाखिल की गई है, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने मामले को जस्टिस Swarn Kanta Sharma की बेंच से स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया था।
याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल और अन्य आरोपियों को इस बात की “गंभीर, ईमानदार और उचित आशंका” है कि यह मामला जस्टिस शर्मा के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई नहीं पा सकता।
यह याचिका उस फैसले के बाद दायर की गई, जब दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बेंच बदलने के अनुरोध को खारिज कर दिया।
जस्टिस शर्मा के आदेश पर आपत्ति
11 मार्च 2026 की तारीख वाले पत्र में केजरीवाल के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia सहित अन्य आरोपियों ने 9 मार्च 2026 के आदेश का हवाला दिया। उस आदेश में जस्टिस शर्मा ने Central Bureau of Investigation (CBI) को अस्थायी राहत दी थी और पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए सूचीबद्ध किया था।
Excise Policy Case | AAP National Convenor Arvind Kejriwal has now approached the Supreme Court with an appeal to change the High Court judge. AAP leader Manish Sisodia has also approached the Supreme Court in connection with the High Court summons case. He challenged the High…
— ANI (@ANI) March 15, 2026
याचिका में यह भी कहा गया कि एक्साइज मामले से जुड़े जस्टिस शर्मा के कुछ पूर्व फैसलों को बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द या आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसी आधार पर आरोपियों ने मामले को किसी अन्य बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
मुख्य न्यायाधीश का फैसला
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि मामला वर्तमान रोस्टर के अनुसार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को ही आवंटित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को रिक्यूज़ल (जज के स्वयं को मामले से अलग करने) की मांग करनी है, तो उसे संबंधित जज के समक्ष ही उठाना होगा।
9 मार्च के आदेश को भी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में जस्टिस शर्मा के 9 मार्च के आदेश को भी चुनौती दी गई है। उस आदेश में उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा CBI जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देशों पर रोक लगा दी थी। साथ ही उन्होंने प्रारंभिक तौर पर कहा था कि बरी करने के आदेश में कुछ टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं।
इसके अलावा हाई कोर्ट ने संबंधित धनशोधन विरोधी मामलों की कार्यवाही को भी स्थगित करने का निर्देश दिया था, जो Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत चल रहे थे।
ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
यह पूरा विवाद 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के बाद शुरू हुआ, जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को 2021-22 दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में बरी कर दिया गया था। इसके बाद Central Bureau of Investigation ने तुरंत दिल्ली हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे रोस्टर के अनुसार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच को सौंपा गया।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel