कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने स्थापना दिवस के मौके पर केरल से बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। त्रिशूर जिले के मट्टथुर कोडकारा स्थित ग्राम पंचायत में स्थानीय निकाय चुनाव जीतने वाले कॉन्ग्रेस के आठ निर्वाचित सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। इन सभी सदस्यों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को समर्थन देने का ऐलान किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मट्टथुर ग्राम पंचायत में यह अप्रत्याशित राजनीतिक बदलाव उस समय देखने को मिला जब कॉन्ग्रेस के सभी आठ सदस्य एक साथ पार्टी छोड़कर बीजेपी समर्थित गठबंधन के साथ खड़े हो गए। इस घटनाक्रम के बाद स्वतंत्र उम्मीदवार टेसी जोस कल्लारक्कल, जो पहले ही चुनाव जीत चुके थे, पूर्व कॉन्ग्रेस सदस्यों और बीजेपी के समर्थन से नवगठित पंचायत के नए अध्यक्ष चुने गए।
24 सदस्यीय इस ग्राम पंचायत में चुनाव परिणाम के बाद पहले किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के पास 10 सीटें थीं, जबकि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को 8 सीटें और नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को 4 सीटें मिली थीं। इसके अलावा दो सदस्य स्वतंत्र थे, जिनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही थी।
अध्यक्ष पद के चुनाव में टेसी जोस कल्लारक्कल को कुल 12 वोट मिले। इनमें कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने वाले सभी आठ सदस्य और बीजेपी के चार में से तीन सदस्यों के वोट शामिल थे। बीजेपी के एक सदस्य का वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। वहीं कॉन्ग्रेस से बगावत कर स्वतंत्र बने के.आर. उसफ को LDF के समर्थन से 10 वोट प्राप्त हुए।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब LDF, कॉन्ग्रेस के बागी स्वतंत्र सदस्य के साथ मिलकर पंचायत में प्रशासन बनाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अचानक कॉन्ग्रेस के पूरे समूह का पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ जुड़ जाना न सिर्फ समीकरण बदलने वाला साबित हुआ, बल्कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व के लिए भी एक बड़ा झटका बन गया।
इस्तीफा देने वाले कॉन्ग्रेस सदस्यों ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने यह कदम पार्टी नेतृत्व द्वारा मंडल कॉन्ग्रेस समिति और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ किए जा रहे अन्याय और उपेक्षा के विरोध में उठाया है। उनका आरोप है कि पार्टी का कार्य करने का तरीका लोकतांत्रिक नहीं रहा और कार्यकर्ताओं की बातों को लगातार नजरअंदाज किया गया।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए CPI(M) की त्रिशूर जिला समिति के सचिव के. वी. अब्दुल खालिद ने कहा कि कॉन्ग्रेस सदस्यों का बीजेपी के साथ जाना एक योजनाबद्ध राजनीतिक कदम था, जिसे कॉन्ग्रेस नेतृत्व की जानकारी में अंजाम दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आठों प्रतिनिधियों ने अपने मतदाताओं के विश्वास को तोड़ा है और बीजेपी की राजनीति के साथ खड़े होकर जनादेश का अपमान किया है।
खालिद ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे गठबंधन कॉन्ग्रेस की जमीनी ताकत को और कमजोर करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के राजनीतिक गठजोड़ के खिलाफ CPI(M) और LDF की ओर से एक मजबूत जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा, ताकि जनता के बीच सच को सामने लाया जा सके।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel