वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States ने रूसी तेल से जुड़े लेन-देन पर 30 दिन की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। 19 मार्च 2026 को U.S. Department of the Treasury द्वारा जारी इस निर्णय का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को बनाए रखना और कीमतों में उछाल को नियंत्रित करना है।
नई छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी और यह केवल उन रूसी तेल शिपमेंट्स पर लागू होगी, जो 12 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुके थे। हालांकि, यह राहत पूरी तरह बिना शर्त नहीं है।
किन देशों पर लागू नहीं होगी छूट
इस छूट के दायरे से Cuba, North Korea और Crimea को बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों पर पहले से लागू प्रतिबंध जारी रहेंगे।
ईरान-इजरायल तनाव और होर्मुज संकट
मिडिल ईस्ट में जारी Iran–Israel conflict ने वैश्विक तेल सप्लाई को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खासकर Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता घट गई है।
इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुँच चुकी हैं, जिससे वैश्विक महंगाई और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
क्यूबा संकट और बढ़ता अमेरिका-रूस तनाव
इस बीच, क्यूबा गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। जनवरी 2026 के बाद से वहां कोई बड़ा तेल टैंकर नहीं पहुँचा है। रूस का तेल टैंकर Anatoly Kolodkin अटलांटिक महासागर में निगरानी में है, जिसमें लगभग 7.3 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ है।
अगर यह टैंकर क्यूबा पहुँचता है, तो यह अमेरिका और रूस के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। हालांकि, क्यूबा की सीमित रिफाइनिंग क्षमता के कारण इस तेल का तत्काल उपयोग संभव नहीं होगा।
भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक India इस फैसले से लाभान्वित हो सकता है। इससे पहले भी भारत की कंपनियां जैसे IOC, BPCL, HPCL, MRPL और रिलायंस रूसी तेल खरीद चुकी हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent के अनुसार, यह कदम अस्थायी है और इसका उद्देश्य केवल वैश्विक सप्लाई को संतुलित रखना है, ताकि बाजार में अस्थिरता कम हो सके और रूस को अतिरिक्त आर्थिक लाभ से रोका जा सके।
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