महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की धमकी और विवादित बयान पर बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने तीखा और बेबाक जवाब दिया है। सोमवार, 12 जनवरी 2026 को मीडिया से बातचीत में अन्नामलाई ने साफ शब्दों में कहा कि वह मुंबई जरूर आएंगे और अगर किसी में हिम्मत है तो उनके पैर काटकर दिखाए। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे उन्हें धमकी देने वाले कौन होते हैं और उन्हें किसान का बेटा होने पर गर्व है। अन्नामलाई ने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ उन्हें गाली देने के लिए बैठकें की जा रही हैं और शायद वह अब इतने “जरूरी” हो गए हैं कि लोग उनके नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
अन्नामलाई ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लिखा है कि अगर वह मुंबई आए तो उनके पैर काट दिए जाएंगे, लेकिन वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “मैं मुंबई आऊँगा, कोशिश करके देखो मेरे पैर काटने की। अगर मैं ऐसी धमकियों से डरता, तो अपने गांव में ही रहता।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वह कामराज को भारत के महान नेताओं में से एक बताते हैं तो क्या इसका मतलब यह होता है कि कामराज तमिल नहीं रहे। उसी तरह, अगर वह मुंबई को एक वर्ल्ड क्लास शहर कहते हैं तो इसका यह अर्थ नहीं कि इसे महाराष्ट्र के लोगों ने नहीं बनाया। अन्नामलाई ने ऐसे बयानों को नासमझी करार दिया।
Chennai, Tamil Nadu | Responding to MNS Chief Raj Thackeray's remarks against him, BJP leader K Annamalai says, "Who are Aaditya Thackeray and Raj Thackeray to threaten me? I am proud to be a farmer’s son. They have organised meetings just to abuse me. I don’t know whether I have… pic.twitter.com/O6QFK9ebxw
— ANI (@ANI) January 12, 2026
दरअसल, यह पूरा विवाद उस बयान के बाद शुरू हुआ जब के. अन्नामलाई ने मुंबई को एक अंतरराष्ट्रीय या वर्ल्ड क्लास शहर कहा था, जिस पर राज ठाकरे भड़क गए। राज ठाकरे ने अन्नामलाई पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “एक रसमलाई तमिलनाडु से आया है, तुम्हारा यहाँ से क्या कनेक्शन है? हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी।” इसके बाद कुछ MNS समर्थकों ने अन्नामलाई को मुंबई आने पर पैर काटने तक की धमकी दे डाली थी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 15 जनवरी 2025 को BMC समेत कई स्थानीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं और इसी पृष्ठभूमि में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। यह विवाद भी उसी राजनीतिक माहौल और चुनावी रैलियों के संदर्भ में सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में एक बार फिर भाषा, पहचान और क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर बहस छेड़ दी है।
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