जम्मू-कश्मीर में चैरिटी के नाम पर बड़े धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। ईरान में युद्ध प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर करीब ₹17.9 करोड़ की राशि इकट्ठा की गई, लेकिन यह पैसा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा।
सूत्रों के मुताबिक, इस फर्जी नेटवर्क की जांच अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही हैं। जांच में टेरर फंडिंग, हवाला लिंक और संदिग्ध नेटवर्क की आशंका जताई गई है।
कैसे चला फर्जी फंडिंग नेटवर्क
यह फंड पूरे कश्मीर में एक संगठित तरीके से इकट्ठा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार:
- बडगाम से करीब ₹9.5 करोड़
- बारामुला से ₹4 करोड़
- श्रीनगर से ₹2 करोड़
इकट्ठा किए गए।
लोगों से मस्जिदों में अपील, घर-घर जाकर कैंपेन और स्टॉल लगाकर दान लिया गया।
‘बरकती मॉडल’ क्या है?
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क 2016 के बाद सामने आए ‘बरकती मॉडल’ जैसा है, जो बुरहान वानी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय हुआ था। इस मॉडल में भावनात्मक और धार्मिक अपील के जरिए बड़ी मात्रा में नकद फंड जुटाया जाता है और बाद में इसे डायवर्ट कर दिया जाता है।
गरीबों को बनाया निशाना
इस घोटाले में कई गरीब परिवारों को निशाना बनाया गया। लोगों ने अपनी ज़िंदगी भर की बचत, गहने, ज़कात और बच्चों की जमा पूंजी तक दान कर दी।
IB की चेतावनी
गृह मंत्रालय की सलाह पर IB ने देशभर में ऐसे फर्जी चैरिटी नेटवर्क को लेकर अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि बिना वेरिफिकेशन के किसी भी फंड में दान न करें, क्योंकि इस तरह के नेटवर्क पहले भी अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के दौरान सामने आ चुके हैं।
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