मध्य प्रदेश के गुना जिले में ईस्टर के मौके पर आयोजित एक सभा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ‘चंगाई सभा’ के नाम पर जनजातीय समुदाय के लोगों को इकट्ठा कर प्रार्थना के जरिए बीमारी और नशा ठीक करने के दावे किए गए और इसके माध्यम से धर्मांतरण का प्रयास किया गया।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी बताई जा रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
भोज और सभा के जरिए लोगों को जुटाने का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, सभा में करीब 300–400 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए दो बकरों और लगभग 40 मुर्गों को काटा गया था।
आरोप है कि इस आयोजन के जरिए लोगों को आकर्षित कर सभा में शामिल कराया गया, जहाँ प्रार्थना के जरिए इलाज का दावा किया गया।
गुना जिले के मोहनपुर खुर्द में चल रहा धर्मांतरण का खुला खेल…#vskmadhyapradesh #guna #madhyapradesh #dharmantaran #धर्मांतरण #conversion#हिन्दू_गर्जना #मध्यभारत_प्रांत_जागरण_पत्रिका pic.twitter.com/4gcrpnxi2H
— Hindu Garjana (@eHinduGarjana) April 7, 2026
‘प्रार्थना से बीमारी ठीक’—ग्रामीणों को दिया गया भरोसा
सभा में मौजूद लोगों से कहा गया कि प्रार्थना के माध्यम से बीमारी और नशे की लत दोनों को ठीक किया जा सकता है।
कई ग्रामीणों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल या पारंपरिक इलाज से राहत नहीं मिली, तो उन्हें इस सभा में आने के लिए कहा गया।
मेहंदी बाई सहित अन्य लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया था और अब प्रार्थना के जरिए इलाज की उम्मीद दिखाई गई।
अंधविश्वास फैलाने और धर्मांतरण के आरोप
स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों का आरोप है कि इस तरह की सभाओं के जरिए एक अंधविश्वास को हटाकर दूसरे अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह भी दावा किया गया कि मिशनरी से जुड़े लोग हर रविवार इस तरह की सभाएं आयोजित करते हैं और इसे ‘मन परिवर्तन’ के रूप में पेश करते हैं।
हिंदू संगठन ने इस घटना को लालच और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण का प्रयास बताया है।
वीडियो वायरल, आयोजक फरार
ईस्टर पर आयोजित इस सभा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कथित आयोजक मौके से गायब बताए जा रहे हैं।
वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो दशकों से क्षेत्र में मिशनरी गतिविधियां सक्रिय रही हैं।
वर्ष 2017 में भी अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई करते हुए कुछ गिरजाघरों को सील किया गया था।
प्रशासन की जांच जारी
मध्य प्रदेश प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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