Ayatollah Ali Khamenei की कथित मौत के 17 दिन बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अपने बड़े बेटे Mojtaba Khamenei को कभी भी ईरान का अगला सुप्रीम लीडर नहीं बनाना चाहते थे।
बेटे की क्षमता पर था संदेह
अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई को अपने बेटे की क्षमता पर भरोसा नहीं था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्हें लगता था कि मोजतबा इस पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं और उनके निजी जीवन को लेकर भी चिंताएं थीं।
हमले से ठीक पहले क्या हुआ?
CBS News और The Telegraph की रिपोर्ट्स के अनुसार,
हमले से कुछ सेकेंड पहले मोजतबा खामेनेई अपने पिता को छोड़कर कंपाउंड से बाहर चले गए थे।
बताया जा रहा है कि वह गार्डन में गए थे, तभी अचानक हमला हुआ, जिसमें अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई।
मोजतबा को भी आई हल्की चोट
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हमले के दौरान मोजतबा खामेनेई को पैर में हल्की चोटें आईं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।
कैसे बने नए सुप्रीम लीडर?
ईरान की धार्मिक संस्था Assembly of Experts ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना है।
लेकिन रिपोर्ट्स में दावा है कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई और दबाव बनाया।
IRGC से मजबूत संबंध
मोजतबा खामेनेई के IRGC के साथ मजबूत संबंध बताए जाते हैं, जो ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य और राजनीतिक संस्थाओं में से एक है।
इसी कारण उनके सत्ता में आने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
बढ़ते सवाल और विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल उठ रहे हैं:
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क्या मोजतबा खामेनेई का चयन निष्पक्ष था?
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क्या ईरान में सत्ता परिवर्तन पर बाहरी या आंतरिक दबाव था?
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क्या यह उत्तराधिकार पहले से तय था?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ईरान की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
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