पश्चिम बंगाल में जावेद अख्तर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मशहूर गीतकार और शायर जावेद अख्तर को बुलाया गया था, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध इतना बढ़ा कि कार्यक्रम को ही रद्द करना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख और राज्य सरकार के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इस कार्यक्रम को रद्द करवाने में अहम भूमिका निभाई। सिद्दीकुल्लाह चौधरी न सिर्फ़ TMC सरकार में मंत्री हैं, बल्कि वे पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी के अध्यक्ष भी हैं।
ममता सरकार द्वारा संचालित बंगाल उर्दू अकादमी ने जावेद अख्तर के कार्यक्रम को रद्द कर दिया, क्योंकि इस्लामवादियों ने उसके शामिल होने का विरोध किया था | परिणामस्वरूप बंगाल सरकार ने @Javedakhtarjadu के उस कार्यक्रम को रद्द कर दिया, क्योंकि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अख्तर के बार-बार… pic.twitter.com/05y61JnMxg
— Satish Chandra Misra (@mishra_satish) September 2, 2025
बताया जा रहा है कि 30 अगस्त 2025 को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एक पत्र लिखकर जावेद अख्तर को कार्यक्रम में बुलाने पर ऐतराज जताया था। पत्र में कहा गया था कि जावेद अख्तर ने पहले इस्लाम को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। यही वजह है कि वे इस कार्यक्रम में उनके शामिल होने का विरोध करते हैं।
इस विरोध और दबाव के बाद पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी ने कार्यक्रम को रद्द कर दिया। विपक्षी दलों ने इसे ममता बनर्जी सरकार की “वोट बैंक राजनीति” से जोड़ते हुए जमकर निशाना साधा है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel