मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सैन्य टकराव से आगे बढ़कर ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है। इजरायल द्वारा ईरान के दुनिया के सबसे बड़े साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद हालात और बिगड़ गए हैं।
इस हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी और संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।
साउथ पार्स पर हमले से भड़का तनाव
करीब 20 दिनों से जारी इस युद्ध में इजरायल ने ईरान के खाड़ी तट पर स्थित असालुयेह के पास साउथ पार्स गैस फील्ड पर एयर स्ट्राइक की। ईरानी मीडिया ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी गैस आपूर्ति पर हमला बताया।
कतर और यूएई पर ईरानी जवाबी हमला
हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर के रास लफान LNG हब पर मिसाइल दागी, जिससे वहां आग लग गई और उत्पादन रोकना पड़ा। कतर सरकार ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा” बताया और ईरान के दो राजनयिकों को निष्कासित कर दिया।
वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने ऊर्जा ढांचों पर हमलों की आशंका के चलते उत्पादन रोक दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर, तेल की कीमतें उछलीं
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल के व्यापार के लिए बेहद अहम है।
इस संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
भारत पर सबसे ज्यादा असर
भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। भारत अपनी LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। भारत हर साल करीब 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें लगभग 47% कतर से आता है।
रास लफान पर हमले और होर्मुज मार्ग बाधित होने से कई गैस टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल, बिजली और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ‘ऑयल वॉर’ लंबा खिंचता है, तो भारत समेत दुनिया भर में ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ सकती है।
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