कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी स्थित मजिस्ट्रेट अदालत में 2014 के मानहानि मामले में पेश हुए। यह मामला आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा दायर किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान एक रैली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर महात्मा गांधी की हत्या को लेकर टिप्पणी की थी।
अदालत में पेशी का कारण उनके पूर्व जमानतदार और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के निधन के बाद नया जमानतदार प्रस्तुत करना था। अदालत के निर्देश के अनुसार राहुल गांधी ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को नया जमानतदार बनाया है।
क्यों पेश होना पड़ा राहुल गांधी को?
राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने बताया कि जमानत देने वाले व्यक्ति के निधन के बाद ताजा सुरक्षा (Fresh Surety) देना अनिवार्य था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था और मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी। वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि माफी मांगने का कोई सवाल नहीं है।
#WATCH | Bhiwandi, Maharashtra: Petitioner Pramod Jaywant says, "During the 2014 Lok Sabha elections, accused Rahul Gandhi, who was then the President of the Congress Party, made a statement in a campaign rally, claiming that RSS members had killed Gandhiji… This statement was… https://t.co/ecuJ5zksLz pic.twitter.com/Gg7rZuTkwM
— ANI (@ANI) February 21, 2026
महाराष्ट्र के भिवंडी की अदालत में चल रहे 2014 के मानहानि मामले में पिटीशनर प्रमोद जयवंत ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराया है। जयवंत का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान एक चुनावी रैली में राहुल गांधी ने बयान दिया था कि महात्मा गांधी की हत्या में RSS के सदस्यों का हाथ था।
पिटीशनर के अनुसार, यह बयान राजनीतिक रूप से प्रेरित था और Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश के तहत दिया गया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी RSS के लिए पूजनीय हैं और गांधीजी की हत्या में संगठन के किसी स्वयंसेवक की कोई भूमिका नहीं थी।
जयवंत ने दावा किया कि उस समय हुए न्यायिक प्रक्रिया, अदालतों में चले मामलों और जांच आयोगों ने स्पष्ट किया है कि गांधीजी की हत्या में RSS की कोई संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 202 के तहत रिपोर्ट तलब की थी।
पिटीशनर का कहना है कि उनका पक्ष शुरू से स्पष्ट रहा है—यदि राहुल गांधी अपने बयान के लिए माफी मांग लेते, तो मामला वहीं समाप्त हो सकता था। फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और अगली तारीख निर्धारित की जा चुकी है।
मुंबई में काले झंडे दिखाए गए
इसी बीच मुंबई में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को काले झंडे दिखाए। इसे भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान युवा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का जवाब बताया गया।
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है। अब अगली सुनवाई में अदालत की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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