मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ताइफ स्थित किंग फहद एयर बेस को अमेरिका के लिए खोलने पर सहमति बन गई है, जो ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Middle East Eye (MEE) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज हो गए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है किंग फहद एयर बेस?
ताइफ में स्थित यह एयर बेस रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रिंस सुल्तान एयर बेस की तुलना में ईरानी ‘शाहिद’ ड्रोन की रेंज से ज्यादा दूर है। प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पहले कई बार हमले हो चुके हैं।
इसके अलावा, ताइफ का स्थान जेद्दाह के करीब है, जो लाल सागर के किनारे स्थित एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बन चुका है—खासतौर पर तब से जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा है।
अमेरिका-इजरायल को समर्थन?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब अब अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
बताया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई है।
युद्ध की तैयारी और बढ़ता तनाव
अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, यदि लंबा युद्ध होता है तो जेद्दाह जैसे बंदरगाहों की भूमिका रसद सप्लाई के लिए बेहद अहम होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूर्वी एशिया से बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।
वहीं, UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायेद ने संकेत दिया है कि उनका देश लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार है।
ईरानी हमले और नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अब तक UAE पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें दुबई भी निशाने पर रहा है। इसके अलावा कतर के गैस प्लांट पर भी हमला किया गया, जिससे उत्पादन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
बदला क्षेत्रीय समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब द्वारा एयर बेस खोलने का फैसला इस बात का संकेत है कि खाड़ी देशों का रुख अब तेजी से बदल रहा है और वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति का समर्थन करने की ओर बढ़ रहे हैं।
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