गुजरात के सूरत जिले में जनजातीय समुदाय की भूमि पर कथित अवैध कब्जा कर एक चर्च बनाए जाने का मामला सामने आया है। उमरपाड़ा के वहार गाँव में स्थानीय लोगों ने इस निर्माण का जोरदार विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि चर्च निर्माण के लिए किसी भी प्रकार की सरकारी अनुमति नहीं ली गई और यह कार्य पूरी तरह अवैध तरीके से किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जनजातीय समुदाय के लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस चर्च के माध्यम से क्षेत्र में धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि लालच देकर आदिवासियों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है, जो उनकी पारंपरिक संस्कृति और मान्यताओं के लिए खतरा है। स्थानीय लोगों ने इसे उनकी परंपराओं को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश बताया।
रिपोर्ट में समुदाय के एक सदस्य ने कहा कि जनजातीय समाज प्राचीन काल से नागदेव, गोवालदेव, वाघदेव सहित कई स्थानीय देवताओं की पूजा-अर्चना करता आया है। उनके अनुसार, ये परंपराएँ अनादि काल से चली आ रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में जनजातीय इलाकों में बड़े-बड़े चर्चों का निर्माण और बिना अनुमति धार्मिक सभाएँ बढ़ गई हैं। इससे उनकी पारंपरिक धार्मिक संरचना पर गंभीर असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रलोभन और आर्थिक लालच देकर भोले-भाले आदिवासियों का धर्मांतरण किया जा रहा है, जो उनकी सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधि है। उन्होंने इस कथित अवैध निर्माण में शामिल ईसाई संगठन और उसके पादरी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत उमरपाड़ा के मामलतदार को सौंपकर उचित कार्रवाई की अपील की है।
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