कंबोडिया में सामने आए जॉब स्कैम को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि इस संगठित क्राइम नेटवर्क का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। इस नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के करीब 5000 भारतीय युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया और आसपास के देशों में भेजा, जहां उन्हें साइबर ठगी का शिकार बनाया गया और बाद में बंधक बनाकर ऑनलाइन अपराध करने के लिए मजबूर किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन युवाओं से संपर्क पाकिस्तानी एजेंटों ने नकली सोशल मीडिया अकाउंट और फर्जी पहचान के जरिए किया था। ये एजेंट उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, तेलंगाना, केरल जैसे राज्यों में सक्रिय थे और युवाओं को आकर्षक सैलरी व विदेश में बेहतर भविष्य का सपना दिखाते थे। भरोसा जीतने के बाद एजेंट ही टिकट, वीजा और यात्रा की पूरी व्यवस्था कराते थे और इस तरह युवाओं को कंबोडिया भेज दिया जाता था।
कंबोडिया पहुंचने के बाद इन भारतीयों को कथित तौर पर साइबर क्राइम सेंटरों में रखा गया, जहां उन्हें ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल्स और डिजिटल अपराधों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की भी शिकायतें सामने आई हैं। कई मामलों में पासपोर्ट जब्त कर लिए गए, जिससे वे वहां से निकल भी नहीं सके।
PS Cyber, @dcp_southwest cracked down on an interstate investment fraud racket operating across Telangana, UP, Rajasthan & Delhi.
08 cheats/fraudsters arrested, 10 high-tech mobile phones containing mule account details recovered.
The syndicate routed duped money through Indian… pic.twitter.com/4errdwZgBW
— Delhi Police (@DelhiPolice) January 18, 2026
यह मामला साल 2024 में तब उजागर हुआ, जब जानकारी मिली कि करीब 5000 भारतीय कंबोडिया में फंसे हुए हैं। इसके बाद भारत सरकार और दूतावास की मदद से कई पीड़ितों को रेस्क्यू कर वापस लाया गया। पूछताछ में पीड़ितों ने बताया कि उनसे संपर्क करने वाले एजेंट पाकिस्तानी थे और उन्होंने फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल व नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।
पीड़ितों के बयानों के आधार पर केंद्रीय एजेंसियों ने फॉरेंसिक जांच की, जिसमें चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग्स की पड़ताल की गई। जांच में सामने आया कि इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस पाकिस्तान में मौजूद सर्वर और हैंडलर्स से जुड़े थे। इससे यह साफ हो गया कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं को निशाना बनाकर किया गया एक सुनियोजित और समन्वित अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क था।
इस गंभीर मामले पर दिसंबर 2024 में आयोजित एंटी टेररिज्म कॉन्फ्रेंस में भी चर्चा हुई थी। पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आने के बाद सीबीआई और एनआईए जैसी एजेंसियां भी जांच में शामिल हुईं। पाकिस्तान से जुड़े जिन आईपी एड्रेस की पहचान हुई है, उन्हें अब सस्पेक्ट रजिस्ट्री में दर्ज कर लिया गया है।
यह सस्पेक्ट रजिस्ट्री नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें करीब 14 लाख साइबर अपराधियों का डेटा शामिल है। इस सूची को सभी बैंकों के साथ भी साझा किया गया है, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा सके।
केंद्रीय एजेंसियों ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया या किसी अनजान व्यक्ति के जरिए विदेश में नौकरी के झांसे में न आएं। एजेंसियों का कहना है कि कंबोडिया जॉब स्कैम सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है, जिस पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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