ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक डिबेट के दौरान भारत के छात्र वीरांश भानुशाली ने पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को करारा जवाब दिया है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की सख्त नीतियों का मजबूती से पक्ष रखते हुए उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका को बेनकाब किया। इस डिबेट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और दुनियाभर में इसकी चर्चा हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डिबेट 26 नवंबर 2026 को ऑक्सफोर्ड यूनियन द्वारा आयोजित की गई थी, जिसका वीडियो अब सामने आया है। डिबेट का विषय था— “सदन मानता है कि पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति एक लोकलुभावन रणनीति है, जिसे सुरक्षा नीति के नाम पर बेचा जा रहा है।” इस बहस में वीरांश भानुशाली ने विपक्ष में बोलते हुए पाकिस्तानी टीम के मूसा हरराज को हराया। मूसा हरराज पाकिस्तान के पूर्व संघीय मंत्री मुहम्मद रजा हयात हरराज के बेटे हैं।
यह डिबेट एक बेहद संवेदनशील तारीख, 26 नवंबर को हुई, जिसे भारत कभी भूल नहीं सकता। इसी दिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने मुंबई में 26/11 का भयावह हमला किया था, जिसमें 250 लोगों की जान गई थी और पूरा शहर दहशत में डूब गया था। वीरांश भानुशाली उस समय मुंबई में ही रहते थे और इस त्रासदी के प्रत्यक्ष गवाह बने थे। डिबेट के दौरान उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा साझा करते हुए पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया।
“This House Believes That India's Policy Towards Pakistan Is a Populist Disguise for Security Policy.”
Viraansh Bhanushali, a law student from Mumbai at the University of Oxford, delivered a compelling opposition speech in the Oxford Union debate on the motion “This House… pic.twitter.com/RWbAw5MfOv
— Augadh (@AugadhBhudeva) December 22, 2025
भानुशाली ने अपनी बात 26/11 के निजी अनुभव से शुरू की। उन्होंने कहा कि हमले के लक्ष्यों में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (CSMT) भी शामिल था, वही स्टेशन जिससे उनकी चाची रोज गुजरती थीं। संयोग या ईश्वर की कृपा से उस रात उन्होंने दूसरी ट्रेन पकड़ी और बाल-बाल बच गईं। उन्होंने याद किया कि कैसे वह एक स्कूली छात्र के रूप में टीवी से चिपके हुए अपने शहर को जलते हुए देख रहे थे। उन्हें अपनी मां की आवाज में डर और पिता के चेहरे पर तनाव आज भी याद है।
वीरांश ने स्पष्ट किया कि वह यह सब माहौल को भावुक करने के लिए नहीं, बल्कि डिबेट को वास्तविकता के धरातल पर लाने के लिए बता रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके घर से महज 200 मीटर दूर एक उपनगरीय रेलवे स्टेशन था, जो 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़ा था, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए थे। उन्होंने कहा कि वह इन त्रासदियों की छाया में ही पले-बढ़े हैं।
पाकिस्तान को जवाब देते हुए वीरांश भानुशाली ने कहा कि जब कोई यह दावा करता है कि पाकिस्तान के प्रति भारत का कड़ा रुख सिर्फ लोकलुभावन राजनीति है, तो इससे स्वाभाविक रूप से गुस्सा आता है। उन्होंने कहा कि इस डिबेट को जीतने के लिए उन्हें भाषणबाजी की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ एक कैलेंडर ही काफी है।
उन्होंने मार्च 1993 के मुंबई धमाकों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय RDX विस्फोटकों ने प्लाजा सिनेमा को तबाह कर दिया था और 257 लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तब चुनाव थे? नहीं, चुनाव तीन साल बाद होने थे। आतंकवाद इसलिए नहीं आया कि भारत में वोट चाहिए थे, बल्कि इसलिए आया क्योंकि दाऊद इब्राहिम और ISI भारत की आर्थिक रीढ़ तोड़ना चाहते थे। उन्होंने इसे लोकलुभावनवाद नहीं, बल्कि युद्ध का एक कृत्य बताया।
26/11 के बाद की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर भारत में लोकलुभावन सरकार होती तो जनता के गुस्से को भुनाने के लिए शायद तत्काल सैन्य कार्रवाई कर दी जाती। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रणनीतिक संयम दिखाया और कूटनीतिक रास्ता चुना। भारत ने सबूत दिए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की, लेकिन इसके बावजूद पठानकोट, उरी और पुलवामा जैसे हमले झेलने पड़े।
वीरांश भानुशाली ने डिबेट में ऑपरेशन सिंदूर का वैश्विक अर्थ भी समझाया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन का नाम उन विधवाओं के सम्मान में रखा गया, जिनका सिंदूर आतंकवादियों ने उजाड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में नौ आतंकी लॉन्चपैड्स को सटीक रूप से नष्ट किया गया, दोषियों को सजा दी गई और भारत ने वहीं रुककर आक्रमण या कब्जे का रास्ता नहीं चुना। उनके अनुसार यह लोकलुभावनवाद नहीं, बल्कि एक पेशेवर और जिम्मेदार सुरक्षा नीति का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि अपने नागरिकों की रक्षा करना लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि वह कोई राजनीतिक चाल है। पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत युद्ध लड़ता है तो वह पायलटों से जानकारी लेता है, जबकि पाकिस्तान तमाशा दिखाकर अपनी जनता का ध्यान असल समस्याओं से भटकाता है।
वीरांश भानुशाली वर्तमान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सेंट पीटर कॉलेज से BA ज्यूरिस्प्रूडेंस (LLB), अंग्रेजी कानून और यूरोप में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। मुंबई में जन्मे वीरांश ने प्रारंभिक शिक्षा NES इंटरनेशनल स्कूल, मुंबई से प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन गए।
वे ऑक्सफोर्ड यूनियन में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी व सचिव समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। अक्टूबर 2023 में उन्होंने ‘द ऑक्सफोर्ड मजलिस’ की सह-स्थापना की, जो सांस्कृतिक और बौद्धिक चर्चाओं पर केंद्रित एक छात्र पहल है।
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