इंदौर में हिंदू किन्नरों पर जबरन धर्म परिवर्तन और HIV संक्रमित इंजेक्शन देने के आरोप, SIT जांच शुरू
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के नंदलालपुरा इलाके में किन्नर समुदाय के बीच गंभीर विवाद सामने आया है, जिसमें हिंदू किन्नरों ने मुस्लिम किन्नरों पर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकारने के लिए दबाव बनाने और विरोध करने पर HIV संक्रमित इंजेक्शन देने के आरोप लगाए हैं। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा हिंदू किन्नर समुदाय की प्रमुख सपना गुरु ने किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के मालेगांव से आए दो मुस्लिम किन्नर – पायल उर्फ नईम अंसारी और सीमा हाजी उर्फ फरजाना – इंदौर में हिंदू किन्नरों को कन्वर्जन के लिए मजबूर कर रहे हैं। सपना गुरु का दावा है कि जो किन्नर इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें जबरन HIV संक्रमित इंजेक्शन देकर बीमार बना दिया गया है।
सपना गुरु के अनुसार, अब तक इस घटना से करीब 60 किन्नर प्रभावित हो चुके हैं, जिनमें से कई गंभीर रूप से बीमार हैं और इलाज करवा रहे हैं। इस भय के कारण कुछ किन्नर अपने डेरे छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ कथित दबाव में आकर मुस्लिम समूह के साथ शामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल किन्नर समुदाय के भीतर भय और तनाव का वातावरण उत्पन्न कर दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी चिंता फैला दी है, क्योंकि अंदेशा है कि शहर में खुलेआम घूम रहे कुछ किन्नर HIV संक्रमित हो सकते हैं।
इंदौर में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने मुस्लिम ट्रांसजेंडरों पर जबरन इस्लाम में धर्मांतरण का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर मुस्लिम ट्रांसजेंडरों ने उन्हें एचआईवी इंजेक्शन दिया!
60 से अधिक लोग संक्रमित, 12 अस्पताल में भर्ती
मोहन यादव सरकार ने त्वरित… pic.twitter.com/uOBt4KoBcN
— One India News (@oneindianewscom) July 17, 2025
सपना गुरु के वकील सचिन गोनकर ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), मुख्य न्यायाधीश (CJI), ज़िला कलेक्टर (DM) और इंदौर पुलिस कमिश्नर को भेजी है, साथ ही मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन जब पुलिस आरोपी पायल के ठिकाने पर पहुंची तो वहां मौजूद अन्य किन्नरों ने टीम को अंदर जाने से रोक दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो इस पूरे प्रकरण की जांच करेगा।
यह मामला न सिर्फ किन्नर समुदाय की सुरक्षा बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जिससे प्रशासन पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।