ईरान और इज़राइल के बीच 28 फरवरी से जारी युद्ध का असर अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में तेज गिरावट ने वैश्विक तेल‑गैस बाजार को झटका दिया है और कई देशों में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और हवाई किराए में तेजी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 27 फरवरी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में औसत सात‑दिन की जहाज आवाजाही 106 जहाज प्रति दिन थी, जबकि पिछले साल इसी समय यह संख्या 83 थी। युद्ध बढ़ने के साथ मार्च की शुरुआत तक यह संख्या केवल 6 जहाज प्रतिदिन रह गई।
इस व्यवधान से प्राकृतिक गैस की कीमतें $2.9 से बढ़कर $3.2 प्रति MMBtu हो गईं। युद्ध के 21 दिनों में पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी इस प्रकार रही:
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ऑस्ट्रेलिया: 32%
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अमेरिका: 24%
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सिंगापुर: 21%
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स्पेन: 19%
वहीं, डीजल की कीमतों में भी वृद्धि हुई:
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ऑस्ट्रेलिया: 40%
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अमेरिका: 33%
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सिंगापुर: 34%
एलपीजी पर निर्भर देशों में घरेलू उपभोग प्रभावित हुआ। महंगाई की असमानता इस प्रकार रही:
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ग्रीस: $223.4 प्रति बैरल समतुल्य
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इज़राइल: $202.6
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यूके: $192.3
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भारत: $103.1
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ऑस्ट्रेलिया: $67.7
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रूस: $61.7
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सऊदी अरब: $46.2
इससे एविएशन सेक्टर पर भी असर पड़ा। इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर जैसी एयरलाइंस ने जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया:
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IndiGo: ₹425
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Air India: ₹399
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Akasa Air: ₹199-₹1,300
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह युद्ध लंबा चला, तो ऊर्जा महंगाई, परिवहन लागत और बिज़नेस पर दबाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
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