पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के विरोध कार्यक्रम में मंच पर पेश किए गए एक कथित साधु को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। Ramakrishna Sarada Mission ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि मिनाखान में उनकी कोई शाखा नहीं है और मंच पर पेश किया गया व्यक्ति संगठन से जुड़ा साधु नहीं है।
SIR अभियान के विरोध में हुआ था प्रदर्शन
6 मार्च को कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने Election Commission of India द्वारा चलाए जा रहे SIR (Special Intensive Revision) अभियान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस अभियान के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया जा रहा था।
कार्यक्रम के दौरान भगवा वस्त्र पहने एक व्यक्ति को मिनाखान स्थित रामकृष्ण सारदा मिशन का साधु बताकर मंच पर बुलाया गया। उस व्यक्ति ने दावा किया कि वह मिनाखान शाखा का अध्यक्ष है और पिछले 14 वर्षों से संगठन की सेवा कर रहा है।
ममता बनर्जी के मंच पर SIR का विरोध करने वाला ‘साधु’ निकला फर्जी, रामकृष्ण सारदा मिशन ने किया खुलासा: कहा- मिनाखान में हमारी कोई शाखा नहीं#MamataBanerjee #FakeSadhu #SIRProtest #Minakhan#RamakrishnaSaradaMission
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— One India News (@oneindianewscom) March 16, 2026
उसने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से उसका नाम हटा दिया गया, इसलिए वह मुख्यमंत्री से मिलने आया है ताकि इस प्रक्रिया को रद्द किया जा सके।
ममता बनर्जी ने उठाए थे सवाल
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए Mamata Banerjee ने कहा था,
“यह शर्म की बात है कि निर्वाचन आयोग एक साधु को भी परेशान कर रहा है, जिनका नाम 2002 की मतदाता सूची में था।”
रामकृष्ण सारदा मिशन का खंडन
हालांकि एक सप्ताह बाद Ramakrishna Sarada Mission ने 15 मार्च को अखबारों में सार्वजनिक नोटिस जारी कर इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया।
संगठन की महासचिव प्रवराजिका अतान्द्रप्रना द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि:
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मिनाखान में रामकृष्ण सारदा मिशन की कोई शाखा नहीं है
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संगठन में किसी पुरुष साधु के अध्यक्ष होने का दावा गलत है
नोटिस में यह भी बताया गया कि Ramakrishna Math से जुड़ी परंपरा में श्री सारदा मठ की स्थापना 1954 में हुई थी और 1959 में इसका औपचारिक पंजीकरण हुआ था।
बाद में 1960 में रामकृष्ण सारदा मिशन की स्थापना शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई।
राजनीतिक विवाद तेज
रामकृष्ण सारदा मिशन के इस नोटिस के बाद यह संकेत मिल रहा है कि चुनाव आयोग के SIR अभियान के विरोध में मंच पर एक फर्जी साधु को पेश किया गया था। इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में विवाद और तेज होने की संभावना है।
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